नाना पाटेकर ने एक इंटरव्यू में बुजुर्ग माता-पिता और बच्चों के बीच बदलते रिश्तों पर खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि कैसे कई बुजुर्ग अपने ही घर में बच्चों की प्राइवेसी के लिए खुद को घर से दूर रखने को मजबूर हो जाते हैं।
Knews Desk – दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर सिर्फ अपनी दमदार अदायगी के लिए ही नहीं, बल्कि समाज से जुड़े मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए भी जाने जाते थे। फिल्म ‘वनवास’ और पारिवारिक रिश्तों पर चर्चा के दौरान टीवी9 को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने आधुनिक पीढ़ी और बुजुर्ग माता-पिता के बीच बदलते रिश्तों की एक ऐसी तस्वीर सामने रखी थी, जो किसी को भी भावुक कर दे।
नाना पाटेकर ने बताया था कि उनका घर शिवाजी पार्क के ठीक सामने है। वह अक्सर देखते थे कि 10-12 बुजुर्ग लोग शाम करीब 6 बजे वहां आकर बैठते थे। इनमें से तीन बुजुर्ग ऐसे थे, जो रात करीब 10 बजे तक वहीं बैठे रहते थे। एक दिन नाना पाटेकर उनसे मिलने पहुंचे और पूछा कि चाचाजी, आप शाम 6 बजे से यहां बैठे हैं और 10 बजने वाले हैं, फिर घर क्यों नहीं गए?
नाना के मुताबिक, बुजुर्ग के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। उन्होंने मुस्कुराते हुए जो जवाब दिया, उसने नाना को अंदर तक हिला दिया। बुजुर्ग ने बताया था कि उनका दो कमरों का छोटा सा घर है। बेटा और बहू दोनों दिनभर नौकरी पर जाते हैं। शाम को जब वे थककर घर लौटते हैं, तो अगर वह घर में मौजूद रहेंगे तो उन्हें प्राइवेसी नहीं मिल पाएगी। इसलिए वह शिवाजी पार्क के कट्टे पर आकर बैठ जाते हैं, ताकि बेटे और बहू को दो-चार घंटे अकेले मिल सकें। रात में जब दोनों सो जाते हैं, तब वह वापस घर जाते हैं।
नाना पाटेकर ने कहा था कि जो मां-बाप अपने बच्चों के लिए जिंदगी भर इतना सोचते हैं, वे बदले में बहुत कुछ नहीं चाहते। उनकी छोटी सी उम्मीद होती है कि जब कभी उनकी आंखों में आंसू आएं तो कोई कंधे पर हाथ रखकर बस इतना पूछ ले- ‘बाबा, कुछ चाहिए क्या?’
अंतिम संस्कार के लिए भी छुट्टी नहीं?
नाना पाटेकर ने उन बच्चों को भी आईना दिखाया था, जो पढ़ाई और पैसे के लिए विदेश चले जाते हैं और अपने बुजुर्ग माता-पिता को भारत में अकेला छोड़ देते हैं। उन्होंने अपने एक दोस्त का उदाहरण देते हुए बताया था कि उसके दो बेटे विदेश में रहते थे। दोस्त की मौत के बाद सिर्फ बड़ा बेटा भारत आया, जबकि छोटा बेटा नहीं आ सका।
जब नाना ने पूछा कि छोटा बेटा क्यों नहीं आया, तो जवाब मिला कि उसे छुट्टी नहीं मिली और वह मां के समय आएगा। इस पर नाना ने कहा था कि अगर उनका बेटा उनसे यह कहे कि आपके अंतिम संस्कार के लिए मेरे पास छुट्टी नहीं है, तो यह बात वह बर्दाश्त नहीं कर सकते।
नाना पाटेकर का कहना था कि बच्चों को विदेश में पढ़ना चाहिए, कमाना चाहिए, लेकिन वहां बसने के बजाय अपने देश वापस आना चाहिए और जो सीखा है, उसका फायदा अपने देश के लोगों को देना चाहिए।
उनकी ये बातें आज भी परिवार, रिश्तों और बुजुर्ग माता-पिता के प्रति हमारी जिम्मेदारियों पर सोचने के लिए मजबूर करती हैं। जिंदगी की भागदौड़ में करियर और पैसे के पीछे दौड़ते हुए कहीं ऐसा न हो कि हमारे अपने ही लोग सिर्फ एक फोन कॉल का इंतजार करते रह जाएं।