नकली बीजों की वजह से कई राज्यों में किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। महाराष्ट्र के कई जिलों में सोयाबीन की बुवाई के बाद अंकुरण नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं। यूपी, एमपी, राजस्थान और तेलंगाना समेत कई राज्यों में भी घटिया और फर्जी बीजों के कारोबार पर कार्रवाई की जा रही है।
Knews Desk- खरीफ फसलों की बुवाई शुरू होते ही नकली बीज बेचने वाले गिरोह भी सक्रिय हो गए हैं। देश के कई हिस्सों से सामने आ रही शिकायतों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र के करीब 18 जिलों में किसानों ने शिकायत की है कि सोयाबीन की बुवाई के 20 से 25 दिन बाद भी खेतों में पौधे नहीं निकले। किसानों का आरोप है कि खराब और नकली बीजों के कारण उनकी फसल बर्बाद हो गई।
महाराष्ट्र में अब तक हजारों किसान इस मामले की शिकायत कृषि विभाग, पुलिस और प्रशासन से कर चुके हैं। सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और कई बीज कंपनियों पर कार्रवाई शुरू की गई है। नकली बीजों की शिकायतों को देखते हुए जांच व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।
हालांकि, नकली बीजों की समस्या केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी फर्जी और खराब गुणवत्ता वाले बीजों की बिक्री के मामले सामने आए हैं।
कई राज्यों में सामने आए नकली बीज के मामले
उत्तर प्रदेश के झांसी, इटावा समेत कई जिलों में नकली मूंगफली बीज बेचने के मामलों में कार्रवाई की गई। सरकार ने बीजों की पूरी सप्लाई चेन पर नजर रखने के लिए ‘साथी पोर्टल’ शुरू किया है, जिससे बीज उत्पादन से लेकर किसानों तक पहुंचने की प्रक्रिया को ट्रैक किया जा सके।
मध्य प्रदेश में भी नकली और घटिया बीज किसानों के लिए बड़ी परेशानी बने हुए हैं। सागर और जबलपुर जैसे क्षेत्रों में प्रशासन ने अवैध तरीके से बीजों की पैकिंग और बिक्री करने वाले ठिकानों पर छापेमारी की थी।
वहीं, राजस्थान में एसीबी ने जून महीने में करीब 15 करोड़ रुपये के घटिया मूंगफली बीज जब्त किए थे। तेलंगाना में भी बड़ी मात्रा में नकली कपास के बीज पकड़े गए हैं।
कैसे चलता है नकली बीजों का कारोबार?
नकली बीज बेचने वाले गिरोह कई तरीकों से किसानों को ठगते हैं।
- बड़ी कंपनियों की नकल: जालसाज नामी कंपनियों जैसी पैकिंग और लोगो बनाकर नकली बीज बाजार में उतार देते हैं।
- बिना प्रमाणित बीजों की बिक्री: कई व्यापारी बिना सरकारी जांच वाले बीजों को बेहतर उत्पादन देने वाला बताकर बेचते हैं।
- पुराने बीजों की दोबारा पैकिंग: एक्सपायर या पुराने बीजों को नए पैकेट में भरकर बाजार में बेच दिया जाता है।
- मिलावट का खेल: असली बीजों में घटिया गुणवत्ता वाले बीज मिलाकर मात्रा बढ़ाई जाती है।
- फर्जी लाइसेंस वाले विक्रेता: कई जगह बिना अनुमति वाले लोग गांवों में घूमकर किसानों को बीज बेचते हैं।
नकली बीज से किसानों को कितना नुकसान?
खराब बीज किसानों के लिए सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि पूरी खेती का चक्र प्रभावित हो जाता है। कई बार बीज अंकुरित नहीं होते या पौधे कमजोर निकलते हैं। इससे उत्पादन घट जाता है और किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ती है।
धान, सोयाबीन, कपास, बाजरा, मूंगफली और सब्जियों के हाइब्रिड बीजों में नकली बीजों का खतरा ज्यादा रहता है। इससे किसानों पर अतिरिक्त खर्च और कर्ज का बोझ बढ़ जाता है।
नकली बीजों के मामले तेजी से बढ़े
आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023-24 में देश में नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों के करीब 3,630 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 32,525 तक पहुंच गई। यानी एक साल में मामलों में कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई।
महाराष्ट्र में स्थिति ज्यादा गंभीर रही। जहां 2023-24 में ऐसे मामले नहीं के बराबर थे, वहीं 2024-25 में बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आईं।
नकली बीज बेचने वालों पर कैसे होती है कार्रवाई?
बीजों की गुणवत्ता जांचने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, राज्य कृषि विभाग, बीज प्रमाणन एजेंसियां और सीड टेस्टिंग लैब काम करती हैं। समय-समय पर बाजार से बीजों के नमूने लेकर उनकी जांच की जाती है।
बीजों की बिक्री और गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिए सीड्स एक्ट 1966, सीड्स रूल्स 1968 और अन्य संबंधित कानून लागू हैं। जांच में दोषी पाए जाने पर विक्रेता का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। साथ ही जुर्माना और जेल की कार्रवाई भी हो सकती है।
बीज खरीदते समय किसान रखें इन बातों का ध्यान
- हमेशा अधिकृत विक्रेता से ही बीज खरीदें।
- बीज खरीदने के बाद पक्का बिल जरूर लें।
- पैकेट पर बैच नंबर, लॉट नंबर और प्रमाणन टैग जांचें।
- पैकिंग और एक्सपायरी तारीख जरूर देखें।
- पैकेट खोलने से पहले उसकी फोटो सुरक्षित रखें।
- बीज और बिल को संभालकर रखें ताकि शिकायत की स्थिति में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।