Knews Desk– उत्तर प्रदेश में हाल ही में शुरू हुए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को लेकर सियासत गरमा गई है। एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में मरम्मत कार्य के दौरान सड़क की सतह को जल्दी सुखाने के लिए पंखों का इस्तेमाल किए जाने का वीडियो सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस पूरे मामले को प्रदेश सरकार के विकास मॉडल पर सवाल खड़े करने वाला बताते हुए सोशल मीडिया के जरिए भाजपा पर निशाना साधा।
अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जिस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुए अभी दो-तीन सप्ताह ही हुए हैं, उसकी मरम्मत की नौबत आ जाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नई सड़क इतनी जल्दी खराब होने लगे तो आम लोग उस पर सुरक्षित यात्रा कैसे करेंगे। सपा प्रमुख ने कहा कि मरम्मत के दौरान सड़क को सुखाने के लिए पंखे लगाए जाना विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह “भाजपाई तरक्की की नई हवा” है, जहां सड़कें मजबूत बनाने के बजाय पंखों से सुखाई जा रही हैं।सपा अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में बनने वाली परियोजनाएं टिकाऊ कम और विवादों में ज्यादा रहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कई निर्माण कार्य समय से पहले ही खराब होने लगते हैं। उनके मुताबिक, भाजपा सरकार के विकास मॉडल में गुणवत्ता की जगह प्रचार को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से बनने वाली परियोजनाओं का टिकाऊ और सुरक्षित होना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
अखिलेश यादव ने इसी मुद्दे को जोड़ते हुए राज्य सरकार की प्रस्तावित ‘अटल प्रोग्रेस वे’ परियोजना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल घोषणाओं तक सीमित रह जाएगी या वास्तव में धरातल पर भी दिखाई देगी। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि यह परियोजना कागजों में ही पूरी दिखाकर उसका “हिस्सा-बांट” पहले ही हो चुका हो। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में बनने वाले कई निर्माण कार्य चलने से ज्यादा धंसते, ढहते और टूटते दिखाई देते हैं।एक्सप्रेसवे की मरम्मत से जुड़े वीडियो के वायरल होने के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विपक्ष सरकार से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उसकी निगरानी पर जवाब मांग रहा है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी लोग इस वीडियो को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई यूजर्स इसे सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए बचाव भी कर रहे हैं।
फिलहाल इस मुद्दे पर सरकार या संबंधित निर्माण एजेंसी की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सड़क निर्माण और रखरखाव को लेकर उठे सवालों के बीच यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना रह सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को जनता की सुरक्षा और सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि अब सभी की नजर सरकार के आधिकारिक स्पष्टीकरण और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।