स्कूल की इमारत गिरा दी, नई बनी नहीं… 4 साल से बरगद के नीचे पढ़ रहे 48 बच्चे, Ground Report

Jabalpur Nakatiya School Ground Report: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के नकटिया गांव में सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत तो गिरा दी गई, लेकिन नई बिल्डिंग अब तक नहीं बन सकी. पहली से आठवीं तक के 48 बच्चे पेड़ के नीचे और आंगनबाड़ी के छोटे कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं.

kNEWS dESK- मध्य प्रदेश में बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्कूलों में सुविधाएं देने के सरकारी दावों के बीच जबलपुर के नकटिया गांव से एक परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है. यहां सरकारी एकीकृत माध्यमिक शाला का भवन करीब चार साल पहले जर्जर होने के कारण गिरा दिया गया था. नई इमारत बनाने का आश्वासन मिला, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हो पाया है. ऐसे में स्कूल के 48 बच्चों की पढ़ाई कभी बरगद के पेड़ के नीचे, तो कभी आंगनबाड़ी के छोटे से कमरे में चल रही है.

जबलपुर जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर नकटिया गांव में स्थित इस स्कूल में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चे पढ़ते हैं. स्कूल की इमारत नहीं होने के कारण मौसम साफ रहने पर बरगद के पेड़ के नीचे टाट-पट्टी बिछाकर कक्षाएं लगाई जाती हैं. गर्मी और धूप के बीच बच्चों को पढ़ाई करने में परेशानी होती है.

बारिश शुरू होते ही हालात और खराब हो जाते हैं. तब सभी आठ कक्षाओं के बच्चों को आंगनबाड़ी के एक छोटे से कमरे में बैठाना पड़ता है. एक ही जगह पर अलग-अलग कक्षाओं के बच्चे और शिक्षक होने से पढ़ाई का माहौल प्रभावित होता है. एक कक्षा को पढ़ाने के दौरान दूसरी कक्षाओं के बच्चों का ध्यान भटकता रहता है.

बच्चों ने बताई अपनी परेशानी

कक्षा सातवीं की छात्रा जान्हवी और अन्य छात्राओं राजकुमारी, अनुराधा, आकांक्षा और सृष्टि ने बताया कि बारिश के दिनों में उनकी पढ़ाई बाधित होती है. छोटे कमरे में बैठने के दौरान जीव-जंतुओं का डर भी बना रहता है.

कक्षा 5वीं से 8वीं में पढ़ने वाले छात्र करण का कहना है कि उसकी स्कूली जिंदगी का बड़ा हिस्सा बिना स्कूल भवन के ही बीत रहा है. बच्चों का कहना है कि उन्हें भी दूसरे स्कूलों की तरह एक अच्छी इमारत और पढ़ाई के लिए पर्याप्त जगह मिलनी चाहिए.

रसोई नहीं, लकड़ी के चूल्हे पर बनता है खाना

स्कूल में सिर्फ कक्षाओं के लिए ही जगह की कमी नहीं है, बल्कि मिड-डे मील की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. खाना बनाने वाली रसोइया मनीषा के मुताबिक, रसोई भवन नहीं होने से खाना तैयार करने में काफी दिक्कत होती है.

गैस सिलेंडर की सुविधा नहीं होने के कारण लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाया जाता है. बारिश के समय परेशानी और बढ़ जाती है. ऐसे में कई बार घर से खाना तैयार करके लाना पड़ता है.

स्कूल के शिक्षक बालाराम विश्वकर्मा और जितेन्द्र कुमार बोपचे ने बताया कि भवन टूटे हुए करीब चार साल हो चुके हैं. जगह की कमी के कारण वे बच्चों को बेहतर तरीके से पढ़ाने में असमर्थ हैं. एक साथ आठ कक्षाओं को संचालित करना काफी चुनौतीपूर्ण है.

अभिभावक दशरथ प्रसाद कुलस्ते और मेहर सिंह मरकाम ने बताया कि बारिश के दौरान बच्चे भीग जाते हैं, जिससे उनके बीमार पड़ने का खतरा रहता है. अभिभावकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि इतने लंबे समय बाद भी स्कूल की नई इमारत नहीं बन सकी.

अधिकारियों ने जल्द निर्माण का किया दावा

जबलपुर जिला पंचायत के सीईओ अभिषेक गहलोत ने बताया कि नकटिया स्कूल भवन के निर्माण के लिए सीएम राइज योजना के तहत करीब 15 लाख रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं. उनका कहना है कि कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक से दो सप्ताह में निर्माण शुरू कराया जाएगा.

स्थानीय विधायक नीरज सिंह ने कहा कि विकसित भारत की बात करते समय बच्चों का पेड़ के नीचे पढ़ना बेहद दुखद है. उन्होंने बताया कि नकटिया स्कूल का मामला उनके संज्ञान में है. स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को निर्माण एजेंसी बनाया गया है और राशि मिलने के बाद दो से तीन महीने में काम पूरा कराने का लक्ष्य है.

जिला परियोजना समन्वयक योगेश शर्मा के अनुसार, वर्ष 2021 में जिले में करीब 40 से 42 जर्जर स्कूल भवन गिराए गए थे. राज्य स्तर से स्वीकृति मिलने में देरी के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ. अब नकटिया स्कूल के लिए स्वीकृति मिल चुकी है.

सरकारी स्कूल की इमारत गिराए जाने के बाद नई बिल्डिंग का इंतजार कर रहे नकटिया के बच्चों को अब अधिकारियों के आश्वासन से उम्मीद है. हालांकि, सवाल यही है कि स्वीकृत राशि और निर्माण की प्रक्रिया कब जमीन पर दिखाई देगी. फिलहाल 48 बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं.

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