Knews Desk- भारतीय कंपनियों के लिए घरेलू कैपिटल मार्केट इन दिनों फंड जुटाने का बड़ा जरिया बना हुआ है। जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान India Inc ने मेनबोर्ड IPO, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट यानी QIP और ऑफर फॉर सेल यानी OFS के जरिए 1.11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए हैं। यह आंकड़ा अक्टूबर-नवंबर 2024 के बाद दो महीनों की सबसे मजबूत फंड-रेजिंग गतिविधियों में शामिल है। उस दौरान कंपनियों ने इन्हीं माध्यमों से करीब 1.14 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे।
IPO बाजार में खास तौर पर तेजी देखने को मिली है। अगस्त में अब तक 20 कंपनियां IPO के जरिए 20,850 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटा चुकी हैं। यह राशि जुलाई में 12 कंपनियों द्वारा जुटाए गए करीब 28,650 करोड़ रुपये के अतिरिक्त है। कुल फंड जुटाने में IPO की हिस्सेदारी 40 फीसदी से अधिक रही है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियों और निवेशकों दोनों का प्राथमिक बाजार पर भरोसा बना हुआ है।
लिस्टेड कंपनियों ने QIP के जरिए भी फंड जुटाने की गतिविधियां बढ़ाई हैं। अगस्त में अब तक चार कंपनियों ने QIP के जरिए करीब 3,250 करोड़ रुपये जुटाए हैं। वहीं जुलाई में आठ कंपनियों ने इस माध्यम से लगभग 25,114 करोड़ रुपये जुटाए थे। QIP का इस्तेमाल आमतौर पर लिस्टेड कंपनियां संस्थागत निवेशकों से पूंजी जुटाने के लिए करती हैं। कंपनियां इस फंड का इस्तेमाल विस्तार, कर्ज कम करने, अधिग्रहण और दूसरी कारोबारी जरूरतों के लिए कर सकती हैं।OFS के जरिए भी अगस्त में बड़ी रकम जुटाई गई है। देश की सबसे बड़ी संस्थागत निवेशकों में शामिल भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC ने अगस्त में करीब 31,447 करोड़ रुपये जुटाए हैं। OFS में मौजूदा निवेशक या प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचते हैं। इससे कंपनी में पब्लिक फ्लोट बढ़ सकता है और बाजार में शेयरों की उपलब्धता भी बढ़ती है।
जुलाई में कोचीन शिपयार्ड ने भी करीब 1,705 करोड़ रुपये जुटाए। विशेषज्ञों के मुताबिक प्राइमरी मार्केट के लिए जरूरी नहीं है कि सेंसेक्स या निफ्टी लगातार तेजी में रहें। बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी, नियंत्रित उतार-चढ़ाव और कंपनियों के कारोबार को लेकर निवेशकों का भरोसा ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।दरअसल, पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, जिसके कारण कई कंपनियों और मौजूदा शेयरधारकों ने अपने फंड जुटाने वाले ट्रांजैक्शन टाल दिए थे। अब बाजार में अपेक्षाकृत स्थिरता आने के बाद कंपनियां बेहतर मौके का फायदा उठा रही हैं। कई कंपनियां ग्रोथ कैपिटल जुटाने, कर्ज घटाने, अधिग्रहण के लिए फंड तैयार करने और रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करने के लिए इक्विटी बाजार का रुख कर रही हैं।
हालांकि, बाजार के सामने चुनौतियां भी मौजूद हैं। जुलाई में सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 2.1 फीसदी और 2.2 फीसदी की तेजी रही, जबकि अगस्त में अब तक दोनों में क्रमशः 0.5 फीसदी और 0.7 फीसदी की गिरावट आई है। इसके बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूती बनी हुई है।घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी भी बाजार को सहारा दे रही है। जुलाई में SIP के जरिए करीब 31,961 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि एक्टिव इक्विटी फंड्स को लगभग 24,700 करोड़ रुपये मिले। घरेलू निवेश की यह मजबूत स्थिति विदेशी निवेशकों की अस्थिर गतिविधियों का असर कम करने में मदद कर रही है। यही वजह है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय कंपनियां बड़े पैमाने पर कैपिटल मार्केट से पैसा जुटाने में सफल हो रही हैं।