KNEWS DESK – केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए तैयारियां तेज कर दी हैं। सरकार जल्द ही लोकसभा में इस अहम विधेयक को पेश करने जा रही है, जिसे कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal सदन में प्रस्तुत करेंगे।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर बड़ा प्लान
सरकार तीन प्रमुख विधेयकों के जरिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की तैयारी में है। इसके साथ ही लंबे समय से लंबित परिसीमन प्रक्रिया को भी दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव है।
इन बदलावों के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 800 से अधिक करने की योजना है, ताकि देश की वर्तमान जनसंख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व तय किया जा सके। अभी सीटों का बंटवारा 1971 की जनगणना के आधार पर है, जो मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से पुराना माना जा रहा है।
नई व्यवस्था कैसे करेगी काम?
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन किया जाएगा और उसी के तहत महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की जाएंगी। यह आरक्षण रोटेशन के आधार पर लागू होगा, यानी हर चुनाव में अलग-अलग सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी विशेष प्रावधान रखा गया है, ताकि समाज के हर वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल सके।
परिसीमन आयोग का गठन
इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए एक परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा। इस आयोग में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश (सेवानिवृत्त या कार्यरत) को अध्यक्ष बनाया जाएगा, जबकि मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके प्रतिनिधि और संबंधित राज्यों के चुनाव आयुक्त भी इसमें शामिल होंगे।
आयोग अपने प्रस्तावों को सार्वजनिक करेगा और आम जनता से सुझाव और आपत्तियां भी मांगेगा। अंतिम निर्णय गजट में प्रकाशित होने के बाद लागू होगा।
बिल पास कराने की चुनौती
इस संवैधानिक संशोधन को पारित कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत यानी करीब 362 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, सरकार को कुछ अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ सकता है।
हालांकि सरकार को उम्मीद है कि महिलाओं से जुड़े इस अहम मुद्दे पर अधिकांश राजनीतिक दल समर्थन देंगे, जैसा कि पहले भी देखा गया है।