डिजिटल डेस्क- वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और सप्लाई चेन में बढ़ती बाधाओं का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार को जारी सरकारी आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है, जिसके अनुसार अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर (WPI) ने पिछले 42 महीनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। ईंधन, बिजली और कच्चे माल की कीमतों में आई भारी तेजी ने न केवल इंडस्ट्री की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि आने वाले समय में आम जनता पर भी महंगाई का बोझ बढ़ने की स्पष्ट आशंका जता दी है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में थोक महंगाई दर बढ़कर 8.30% पर पहुंच गई है। यह उछाल कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने यानी मार्च में यह दर महज 3.88% थी। महज 30 दिनों के भीतर महंगाई का ग्राफ इतनी तेजी से ऊपर जाना अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा की कीमतों में वैश्विक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे माल की कमी इस उछाल की मुख्य वजह है।
ईंधन और बिजली की कीमतों ने लगाई आग
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा महंगाई ‘फ्यूल एंड पावर’ कैटेगरी में दर्ज की गई है। इस श्रेणी की महंगाई दर पिछले महीने के 1.05% से सीधे छलांग लगाकर 24.71% पर पहुंच गई है। पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों का सीधा असर अब घरेलू लागत पर दिखने लगा है। बिजली और ईंधन महंगा होने से न केवल परिवहन लागत बढ़ी है, बल्कि फैक्ट्रियों में उत्पादन करना भी अब पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है।
खाद्य और कच्चे उत्पादों पर भी बढ़ा दबाव
महंगाई की यह आंच केवल ईंधन तक सीमित नहीं है। खाद्य महंगाई दर भी पिछले महीने के 1.85% से बढ़कर 2.31% हो गई है। हालांकि खाद्य उत्पादों में बढ़त अन्य श्रेणियों की तुलना में कम है, लेकिन प्राइमरी आर्टिकल्स (कच्चे उत्पाद) की महंगाई दर 6.36% से बढ़कर 9.17% हो गई है। कच्चा माल महंगा होने से विनिर्माण क्षेत्र पर इनपुट कॉस्ट का दबाव बढ़ गया है। मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई भी 3.39% से बढ़कर 4.42% हो गई है, जो यह संकेत है कि अब कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना शुरू कर सकती हैं।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चौतरफा बढ़ोतरी
थोक महंगाई सूचकांक (WPI) में 64.23% की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले ‘मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स’ के इंडेक्स में अप्रैल में 1.40% की बढ़त देखी गई। हैरान करने वाली बात यह है कि कुल 22 मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप्स में से 21 में कीमतों में इजाफा हुआ है। इनमें बेसिक मेटल्स, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स, फूड प्रोडक्ट्स और मशीनरी जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। केवल एक ग्रुप ‘अदर मैन्युफैक्चरिंग’ में मामूली गिरावट देखी गई।