KNEWS DESK- संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संसद को हंगामे और बार-बार होने वाले स्थगन से बचाकर देश के गंभीर मुद्दों पर सार्थक चर्चा करनी चाहिए। मायावती ने महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे विषयों को जनता से जुड़े अहम सवाल बताया।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। इस बार सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं, क्योंकि विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। इनमें अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद, नीट पेपर लीक मामला, विपक्षी दलों में टूट-फूट और अन्य राजनीतिक मुद्दे शामिल हैं।
मायावती ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह देखना होगा कि मानसून सत्र भी पिछले सत्रों की तरह हंगामे और स्थगन की भेंट चढ़ता है या फिर देश के सामने खड़ी गंभीर समस्याओं पर ईमानदारी से चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि संसद में जनता की परेशानियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और सभी दलों को जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए। बसपा प्रमुख ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी चोरी, हेराफेरी और गबन के आरोपों को लेकर जनता में आक्रोश है। मायावती ने कहा कि यह मामला देश और प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और संसद में भी इस मुद्दे को उठाए जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जनता उन लोगों से जवाब चाहती है जो राजनीतिक लाभ के लिए धर्म और आस्था से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल करते हैं।
इसके अलावा मायावती ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं के भविष्य से जुड़ी हैं और इन पर गंभीर बहस जरूरी है। उन्होंने सरकार और विपक्ष दोनों से अपील की कि वे छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीति से ऊपर उठकर देखें। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी मायावती ने कई राज्यों की घटनाओं का जिक्र करते हुए चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां गंभीर विषय हैं, जिन पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने राजस्थान में गर्भवती महिलाओं की मौत, विभिन्न राज्यों में महिला असुरक्षा और सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार जैसे मामलों को भी उठाया।
मायावती ने चुनावी वादों और योजनाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण हो, यह सुनिश्चित करना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण और आम लोगों से जुड़े अन्य मामलों पर भी चिंता व्यक्त की। अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का जिक्र करते हुए बसपा प्रमुख ने अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव तथा भारतीय मुद्रा के कमजोर होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों का असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता के जीवन पर पड़ रहा है। ऐसे में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी दलों को देशहित में काम करना चाहिए।
मायावती ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि संसद की गरिमा बनाए रखें। उन्होंने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और टकराव से बचने की अपील करते हुए कहा कि देश की करीब 140 करोड़ आबादी से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि मानसून सत्र शांतिपूर्ण, स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप और जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। मायावती ने कहा कि संसद जनता की आवाज उठाने का सबसे बड़ा मंच है और इसका उपयोग देश की समस्याओं के समाधान के लिए किया जाना चाहिए।