महिला आरक्षण पर तेज हुई सियासत, सीएम योगी की अगुवाई में यूपी में बीजेपी कल निकालेगी पैदल मार्च, दोनों डिप्टी सीएम भी रहेंगे शामिल

डिजिटल डेस्क- नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित न हो पाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर देशभर में आक्रामक रुख अपना लिया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में मंगलवार को बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन देखने को मिलेगा, जहां पार्टी महिला आरक्षण के समर्थन में पैदल मार्च निकालने जा रही है। इस मार्च में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बज्रेश पाठक भी शामिल होंगे। राजधानी लखनऊ में यह पदयात्रा मुख्यमंत्री आवास, कालिदास मार्ग से शुरू होकर विधानसभा तक जाएगी। इस दौरान बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और खास तौर पर महिला मोर्चा की सदस्याएं हिस्सा लेंगी। बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि आसपास के जिलों से भी हजारों महिला कार्यकर्ताओं को इस मार्च में शामिल होने के लिए बुलाया गया है, जिससे इसे एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश किया जा सके।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष को घेरने के लिए भाजपा निकालेगी मार्च

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस पदयात्रा का उद्देश्य महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष को घेरना और जनता के बीच यह संदेश देना है कि बीजेपी महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीर है। पार्टी का आरोप है कि विपक्ष ने मिलकर इस विधेयक को पास नहीं होने दिया और अब वही दल महिला सशक्तिकरण की बात कर रहे हैं। इस बीच, बीजेपी ने आगे की रणनीति भी तय कर ली है। 28 अप्रैल को वाराणसी में एक विशाल कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें करीब 50 हजार महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। इस कार्यक्रम को भी महिला सशक्तिकरण के बड़े मंच के रूप में तैयार किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी महिला सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

भाजपा महिला आरक्षण को जनआंदोलन के रूप में पेश करना चाह रही

बीजेपी नेताओं का कहना है कि ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ की रूपरेखा पहले ही तैयार कर ली गई थी, लेकिन विधेयक के पारित न होने के बाद अब इसे और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। पार्टी इसे सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में जनआंदोलन के रूप में पेश करना चाहती है। दूसरी ओर, विपक्षी दल इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरने में जुटे हैं। उनका कहना है कि विधेयक के गिरने की जिम्मेदारी सरकार की है और वह इसे लागू करने को लेकर गंभीर नहीं है। हालांकि बीजेपी इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे विपक्ष की “साजिश” बता रही है।

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