KNEWS DESK- नोएडा में श्रमिकों का प्रदर्शन अचानक उग्र होकर बड़े पैमाने की हिंसा में बदल गया, जिससे शहर की कानून-व्यवस्था और औद्योगिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है। वेतन वृद्धि की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन देखते ही देखते नियंत्रण से बाहर हो गया और प्रदर्शनकारियों ने कई इलाकों में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की। इस पूरी घटना ने नोएडा के औद्योगिक ढांचे को झकझोर कर रख दिया है।
हिंसा के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान वाहनों को हुआ है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार करीब 150 वाहनों को निशाना बनाया गया, जिनमें लगभग 100 चार पहिया वाहन और 50 दोपहिया शामिल हैं। कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे वे पूरी तरह जलकर खाक हो गए, जबकि कई के शीशे तोड़े गए और उन्हें बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया गया। इन घटनाओं से आम नागरिकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस हिंसा का सबसे गंभीर असर औद्योगिक क्षेत्र पर देखने को मिला है। जानकारी के मुताबिक लगभग 300 फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों में तोड़फोड़ की गई। प्रदर्शनकारियों ने फैक्ट्री गेट तोड़े, कार्यालयों में घुसकर सामान और मशीनों को नुकसान पहुंचाया और कई जगहों पर शोरूम व सर्विस सेंटर को भी निशाना बनाया। इससे उद्योगपतियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
विशेष रूप से फेस-2, सेक्टर 63, 57, 58, 62 और ईकोटेक थर्ड जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में हालात बेहद खराब रहे। सेक्टर 63 में तो स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस थाने तक पर पथराव किया गया। कई जगह सड़कों को जाम कर दिया गया और पुलिस के साथ टकराव की घटनाएं भी सामने आईं।
घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत सख्ती दिखाते हुए पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। अब तक 90 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है, जबकि 300 से ज्यादा संदिग्धों की पहचान की जा रही है। संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि दोबारा ऐसी घटना न हो सके।
इस बीच सरकार ने स्थिति को शांत करने के लिए श्रमिकों की कुछ मांगों को स्वीकार करते हुए न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी का फैसला भी लिया है। अधिकारियों का कहना है कि बातचीत के जरिए ही स्थायी समाधान निकाला जाएगा और हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं है।
प्रशासन लगातार श्रमिकों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है और उन्हें बातचीत के लिए बुलाया गया है। ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण में बैठक आयोजित कर दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि हालात जल्द सामान्य हो सकें।
नोएडा में हुई यह हिंसा न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी है, बल्कि इसने औद्योगिक छवि को भी नुकसान पहुंचाया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन कितनी तेजी से स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लाता है और इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को कैसे रोकता है।