NHAI टोल घोटाले पर ED की बड़ी कार्रवाई, 7 राज्यों में 14 ठिकानों पर छापेमारी

KNEWS DESK- राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की है। ED की लखनऊ जोनल टीम ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, NCR और पश्चिम बंगाल के कोलकाता में की जा रही है।

जांच एजेंसी को शक है कि कुछ NHAI टोल प्लाजा पर अनऑथोराइज्ड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर फर्जी टोल रसीदें तैयार की जा रही थीं। आरोप है कि इस माध्यम से टोल से प्राप्त रकम को NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट किया जाता था। इससे सरकारी राजस्व को बड़ा नुकसान होने की आशंका जताई गई है।

फर्जी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के मिले सबूत

ED की जांच में सामने आया है कि फर्जीवाड़े में इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर के बारे में फॉरेंसिक जांच और NHAI के रिकॉर्ड में भी जानकारी मिली है। अब एजेंसी तलाशी के दौरान डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज, बैंक खातों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

जांच का एक अहम हिस्सा इस बात का पता लगाना है कि टोल से कथित तौर पर डायवर्ट की गई रकम आखिर किन लोगों तक पहुंची। ED मनी ट्रेल को खंगालने के साथ-साथ इस मामले में कथित अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है। टोल संचालकों, IT कर्मचारियों और अन्य आरोपियों के बीच रकम बांटे जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।

फर्जी FASTag से वाहनों को निकालने का आरोप

मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि फर्जी FASTag और अन्य तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल कर ओवरलोडेड और कमर्शियल वाहनों को टोल से निकाला जाता था। इस पूरे नेटवर्क को लेकर UP STF और केंद्रीय जांच एजेंसियां पहले से कई टोल संचालकों के खिलाफ जांच कर रही हैं।

कथित मास्टरमाइंड आलोक सिंह गिरफ्तार

इस मामले में वाराणसी से कथित मास्टरमाइंड आलोक सिंह की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। आरोप है कि वह वाराणसी के हरहुआ इलाके में रहकर इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहा था। वहीं वाराणसी के लाला नगर टोल प्लाजा से जुड़े करीब 62.87 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी के मामले की भी जांच की जा रही है।

जांच का दायरा अब काफी बड़ा हो चुका है। देशभर के 200 से अधिक टोल प्लाजा जांच के दायरे में हैं, जिनमें करीब 100 टोल प्लाजा उत्तर प्रदेश के बताए जा रहे हैं।

पिछले महीने भी हुई थी कार्रवाई

ED ने पिछले महीने भी इसी कथित फर्जी टोल वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में PMLA की धारा 17 के तहत 14 ठिकानों पर तलाशी ली थी। उस कार्रवाई में भी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, NCR और कोलकाता के परिसरों को शामिल किया गया था।

अब ताजा छापेमारी के दौरान ED डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ बैंक खातों और कथित बेनामी संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। एजेंसी का फोकस कथित टोल घोटाले की पूरी रकम और उसके अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने पर है।

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