KNEWS DESK- पंजाब में नशा विरोधी मुहिम के तहत 16,788 निरीक्षण किए गए। इस दौरान 214 लाइसेंस प्राप्त और बिना लाइसेंस वाली फर्मों से ₹20.64 करोड़ की दवाएं जब्त की गईं, जबकि 520 केमिस्टों के लाइसेंस सस्पेंड और 22 के लाइसेंस रद्द किए गए।
पंजाब में भगवंत सिंह मान सरकार ने नशा विरोधी कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के ड्रग विंग ने 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच कुल 16,788 निरीक्षण किए। इस दौरान ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 का उल्लंघन करने के मामले में 214 लाइसेंस प्राप्त और बिना लाइसेंस वाली फर्मों से ₹20.64 करोड़ की दवाएं जब्त की गईं। इसके अलावा, 520 केमिस्टों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए और 22 केमिस्टों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के निर्देशों पर दवाओं के दुरुपयोग को रोकने और कानूनों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण किए जा रहे हैं। नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर नियंत्रण मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने प्रीगैब्लिन को ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल H1 में शामिल किया है। इसके लिए 13 मई 2026 को अधिसूचना संख्या G.S.A. 377(E) जारी की गई थी। यह नियम 12 नवंबर 2026 से लागू होगा। इससे पहले प्रीगैब्लिन को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 या ड्रग्स रूल्स, 1945 की किसी भी अनुसूची में शामिल नहीं किया गया था। पंजाब सरकार ने इसके दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार को कई पत्र लिखकर नियामक हस्तक्षेप की मांग की थी।
राज्य सरकार ने ई-फार्मेसी के माध्यम से ऑनलाइन दवाओं की बिक्री को नियंत्रित करने वाले नियमों की कमी का मुद्दा भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के सामने उठाया है। सरकार का कहना है कि नशे के रूप में इस्तेमाल की जा सकने वाली दवाएं ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, जिससे इनके दुरुपयोग पर रोक लगाने के प्रयास प्रभावित होते हैं। पंजाब सरकार ने राज्य में बिक्री के लिए आठ प्रकार के ड्रग फॉर्मूलेशन के स्टॉक पर भी प्रतिबंध लगाया है। हालांकि, ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा नहीं होने के कारण कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करने में चुनौतियां बनी हुई हैं।
भगवंत मान सरकार ने दवाओं की बढ़ती कीमतों और अलग-अलग कंपनियों की ओर से निर्मित उन दवाओं के मूल्य में अंतर का मुद्दा भी उठाया है, जिनमें सक्रिय फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट यानी सॉल्ट एक समान होता है। राज्य सरकार के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के हालिया हस्तक्षेप और निर्देशों से पहले केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया था।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के तहत 54 मामले अदालतों में दर्ज किए गए। इनमें से 35 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई और जुर्माना लगाया गया, जबकि राज्य की अलग-अलग जिला अदालतों में कुल 650 मामले अभी लंबित हैं। पंजाब सरकार ने जनहित और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर काम जारी रखने के साथ पूरे राज्य में दवा संबंधी कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।