KNEWS DESK- हिमाचल प्रदेश के मंडी में शनिवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद कंगना रनौत का अधिकारियों के प्रति सख्त रुख देखने को मिला। बैठक के दौरान उन्होंने विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत जारी फंड के इस्तेमाल में कथित देरी को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा।
कंगना ने सवाल उठाया कि जब जनता के विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये जारी किए जा चुके हैं, तो उनका इस्तेमाल समय पर क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से लंबित परियोजनाओं और फंड के उपयोग की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी।
5.5 करोड़ में सिर्फ 50-60 लाख खर्च होने पर सवाल
बैठक में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, मंडी क्षेत्र में करीब 5.5 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध कराया गया था, लेकिन इसमें से लगभग 50 से 60 लाख रुपये ही खर्च किए जाने की बात सामने आई। वहीं, कुल मिलाकर करीब 11 करोड़ रुपये जारी किए जाने का उल्लेख किया गया।
कम खर्च को लेकर कंगना ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब विकास कार्यों के लिए पैसा उपलब्ध है, तो योजनाओं को जमीन पर उतारने में परेशानी कहां आ रही है। उन्होंने अधिकारियों से यह भी जानना चाहा कि किन परियोजनाओं में देरी हो रही है और उसके पीछे जिम्मेदारी किसकी है।
90 फीसदी खर्च के दावे पर भी उठाए सवाल
बैठक के दौरान फंड के करीब 90 फीसदी इस्तेमाल से जुड़े दावों पर भी चर्चा हुई। कंगना ने आंकड़ों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर होने की बात कहते हुए ऐसे दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने अधिकारियों से वास्तविक खर्च और प्रगति की जानकारी रिकॉर्ड के साथ उपलब्ध कराने को कहा।
सांसद ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं के लिए आवंटित पैसा जनता का पैसा है और उसका समय पर तथा उचित तरीके से इस्तेमाल होना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से काम की प्रगति को लेकर जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
अधिकारियों से मांगी परफॉर्मेंस रिपोर्ट
कंगना रनौत ने बैठक में अधिकारियों के कामकाज और लंबित परियोजनाओं की स्थिति की रिपोर्ट मांगी। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय उनका लाभ लोगों तक पहुंचना चाहिए।
बैठक में विकास कार्यों में आ रही अड़चनों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सांसद ने अधिकारियों को लंबित कामों की समीक्षा करने और जरूरी कदम उठाने पर जोर दिया।
भ्रष्टाचार और गड़बड़ी के आरोपों का भी मुद्दा
बैठक के दौरान कथित वित्तीय गड़बड़ी और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों का मुद्दा भी उठाया गया। हालांकि, इन मामलों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी से नहीं होती है। कंगना ने अधिकारियों से ऐसे मामलों पर भी गंभीरता से कार्रवाई करने और संबंधित रिकॉर्ड की जांच करने को कहा।
कंगना के इस रुख को उनके समर्थकों ने सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में उठाया गया कदम बताया। वहीं, आलोचकों ने उनके तेवर को राजनीतिक प्रदर्शन करार दिया। हालांकि, बैठक का मुख्य मुद्दा विकास कार्यों की रफ्तार और उपलब्ध सरकारी फंड के प्रभावी इस्तेमाल को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगना रहा।