डिजिटल डेस्क- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान के बीच सियासी माहौल और गर्म हो गया है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नदिया जिले के कृष्णानगर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग की सराहना की और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कई दशकों में यह पहला मौका है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा का स्तर बेहद कम देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा, “मैं कह सकता हूं कि पिछले 50 वर्षों में यह पहला ऐसा चुनाव है जिसमें हिंसा न्यूनतम स्तर पर है।” इसके लिए उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की जमकर तारीफ की और कहा कि आयोग ने बंगाल में लोकतंत्र की गरिमा को फिर से स्थापित किया है।
बंगाल में पहले अराजकता और गुंडागर्दी का माहौल रहता था- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने पुराने दौर की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि पहले राज्य में अराजकता और गुंडागर्दी का माहौल रहता था। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंसा और डर का माहौल बनाकर लोगों की आवाज दबाई जाती थी, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और जनता खुलकर अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों की भी सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत की वजह से चुनाव प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “मैंने झालमुड़ी खाई और मिर्ची टीएमसी को लग रही है।” इस तंज के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि राज्य में सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ लोगों में भारी नाराजगी है। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के विधायक, मंत्री और स्थानीय नेताओं के खिलाफ जनता में गुस्सा इतना ज्यादा है कि कई इलाकों में पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाएगी।
संबोधन में किया जंगलराज का जिक्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि 15 साल पहले पश्चिम बंगाल की जनता ने वामपंथी शासन के खिलाफ आवाज उठाई थी और अब वही जनता टीएमसी सरकार के खिलाफ खड़ी हो रही है। उन्होंने ‘जंगलराज’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि लोग अब बदलाव चाहते हैं और गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले में इस बदलाव की आवाज गूंज रही है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि यह चुनाव किसी एक पार्टी या नेता का नहीं, बल्कि खुद जनता का चुनाव बन चुका है। उन्होंने कहा, “यह चुनाव हम नहीं लड़ रहे हैं, इस बार बंगाल की जनता खुद चुनाव लड़ रही है।” उन्होंने मतदाताओं के उत्साह को ‘भय पर भरोसे की जीत’ बताते हुए कहा कि अब लोग डर के साये से बाहर निकलकर अपने अधिकारों के लिए आगे आ रहे हैं।