डिजिटल डेस्क- अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के देहांत की खबर के बाद पूरी दुनिया के मुसलमानों, खासकर शिया समुदाय में गहरा शोक देखा जा रहा है। ईरान से लगातार भावुक कर देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिनमें लोग सीना पीट-पीटकर मातम मना रहे हैं। लंबे समय तक यह शोकगाथा जारी रहने का अनुमान है। अब जबकि दुनिया इस ऐतिहासिक शख्सियत के अंतिम संस्कार की तैयारियों पर नजर गड़ाए बैठी है, हम आपको बताते हैं कि आम तौर पर ईरान में सुप्रीम लीडर का अंतिम संस्कार कैसे होता है और उन्हें कहां दफनाया जा सकता है। सांप्रदायिक भावना और धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखते हुए अंतिम संस्कार सादगी के साथ किया जाता है, जैसा कि इस्लाम में परंपरागत रूप से अपनाया जाता है।
अंतिम संस्कार का धार्मिक तरीका
जिस तरह से इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार होता है, उसमें सबसे पहले शव को गुस्ल (धार्मिक स्नान) दिया जाता है। इसके बाद शव को सफेद कफन में लपेटा जाता है। यह तरीका आम व्यक्ति के अंतिम संस्कार में अपनाया जाता है और सुप्रीम लीडर के मामले में भी इसी सादगी और धार्मिकता को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, जब कोई अत्यंत प्रभावशाली और बड़े पद पर रहने वाली हस्ती इस दुनिया से रुख़सत होती है, तो भीड़ की तादाद लाखों में पहुंच सकती है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो 1989 में पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के जनाजे में भी लाखों लोग शामिल हुए थे और कुछ स्थानों पर हालात नियंत्रण से बाहर हो गए थे। ऐसे में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर ईरानी प्रशासन सतर्क है।
संभावित अंतिम संस्कार स्थल
जहां तक खामेनेई की तदफीन (दफन) की बात है, इसके दो प्रमुख संभावित स्थान सामने आ रहे हैं। पहला ईरान की राजधानी तेहरान, जहां राजनीतिक और प्रशासनिक तौर पर महत्वपूर्ण अधिकारी दफन किए जाते हैं। दूसरा विकल्प धार्मिक नगरी मशहद है, जहां पर शिया समुदाय के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल इमाम रजा की मजार स्थित है। अगर हम इतिहास को देखें तो पहले सुप्रीम लीडर खुमैनी को तेहरान में बने उनके मकबरे में दफनाया गया था, जिसे रूहोल्लाह खुमैनी का मकबरा कहा जाता है। इसलिए यह संभावना है कि इस बार भी शासन और धार्मिक विचारधारा को ध्यान में रखते हुए उन्हें इसी शहर में अंतिम विश्राम स्थल दिया जाए।
शोक और राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
उनकी मौत के पश्चात ईरान सरकार ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक और 7 दिनों की सरकारी छुट्टी का ऐलान किया है। यह निर्णय दर्शाता है कि खामेनेई सिर्फ राजनीतिक नेता नहीं बल्कि शिया समुदाय और समूचे देश के लिए एक प्रतीकात्मक नेता थे। ईरान के संविधान में सुप्रीम लीडर का पद 1979 की इस्लामिक क्रांति के पश्चात स्थापित किया गया था। पहले इस पद पर रुहोल्लाह खुमैनी थे, जिन्हें 3 दिसंबर 1979 को देश का पहला सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया था। वे साढ़े नौ साल तक इस पद पर रहे, और उनके निधन के बाद अयातुल्ला अली खामेनेई को देश का दूसरा सुप्रीम लीडर चुना गया था।