ईंधन बचाने की मुहिम: बुलेट पर विधान भवन पहुंचे सीएम फडणवीस, मंत्रियों ने काफिलों में की 50% की कटौती

डिजिटल डेस्क- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन की खपत कम करने और संसाधनों के संरक्षण की अपील का असर अब देश के विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर दिखने लगा है। महाराष्ट्र से लेकर आंध्र प्रदेश तक, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने अपनी जीवनशैली और सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव कर एक नई मिसाल पेश की है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को उस समय सबको चौंका दिया, जब वे अपनी सरकारी गाड़ी छोड़कर मोटरसाइकिल (बुलेट) से विधान भवन पहुंचे। दक्षिण मुंबई की सड़कों पर गुरुवार को एक अनोखा नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अपने सरकारी आवास ‘वर्षा’ से मोटरसाइकिल पर सवार होकर विधान भवन पहुंचे। उनके साथ भाजपा नेता और मंत्री आशीष शेलार भी मोटरसाइकिल पर नजर आए। मुख्यमंत्री नए विधान परिषद सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए इस अंदाज में पहुंचे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम प्रधानमंत्री की अपील के जवाब में ईंधन बचाने और मितव्ययिता बरतने के व्यापक अभियान का हिस्सा है।

मंत्रियों ने अपनाया पैदल मार्च और कटौती का रास्ता

ईंधन संरक्षण की इस मुहिम में केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी भी पीछे नहीं हैं। राज्य मंत्री नितेश राणे ने मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल होने के लिए अपने आवास से मंत्रालय (राज्य सचिवालय) तक का सफर पैदल तय किया। इससे पहले मुख्यमंत्री फडणवीस ने आधिकारिक घोषणा की थी कि सभी मंत्रियों के काफिलों में वाहनों की संख्या को तत्काल प्रभाव से आधा (50%) कर दिया जाएगा। साथ ही, अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाने के लिए मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के विदेश दौरों को भी रद्द कर दिया गया है।

आंध्र प्रदेश और बिहार में भी दिखा असर

ईंधन बचाने की यह लहर केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी अपने सुरक्षा काफिलों का आकार छोटा कर दिया है। मुख्यमंत्री के पुत्र और राज्य के सूचना एवं मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने अपने सुरक्षा अमले को निर्देश दिया है कि उनके काफिले में अब केवल दो ही वाहन रहेंगे। उन्होंने यह निर्णय पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन की संभावित किल्लत और पीएम मोदी की अपील को ध्यान में रखते हुए लिया है। वहीं, बिहार में भी गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के कार्यालय ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि मंत्री की यात्राओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में वाहनों की संख्या कम रखी जाए। यह पत्र सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के मितव्ययिता अभियान का समर्थन करता है।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और अनुशासन का संदेश

एक ओर जहाँ ईंधन बचाने के लिए बड़े प्रशासनिक फैसले लिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की नई शुभेंदु अधिकारी सरकार ने स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य कर अनुशासन का संदेश दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन सभी कदमों का उद्देश्य देश में एक ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है जो संसाधनों के प्रति संवेदनशील हो और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति समर्पित हो।

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