क्रेन-JCB भी फेल! उज्जैन में खड़े हनुमान जी की मूर्ति को हटाने की कोशिश नाकाम, अब विशेषज्ञ करेंगे जांच

Knews Desk – उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कोशिश प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है। पिछले चार दिनों में प्रतिमा को स्थानांतरित करने के चार प्रयास किए गए, लेकिन भारी मशीनों के इस्तेमाल के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। अब प्रशासन ने भारी मशीनरी से प्रयास रोककर विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है।

कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण की जद में आए इस प्राचीन मंदिर के गर्भगृह और मुख्य ढांचे को तोड़ा जा चुका है। फिलहाल हनुमान जी की प्रतिमा को कैनोपी टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं ने एक पोस्टर भी लगाया है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि प्रतिमा को स्थानांतरित करने के दौरान यदि किसी भी तरह का नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस बीच रविवार शाम मंदिर परिसर और आसपास की इमारतों की छतों पर 50 से अधिक वानरों के पहुंचने का वीडियो सामने आया। कई घंटे तक वानर वहां मौजूद रहे। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों के बीच धार्मिक चर्चा शुरू हो गई और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सोमवार सुबह मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पहुंचे। कई लोगों ने प्रतिमा के स्थानांतरण से पहले इसे अंतिम दर्शन के तौर पर देखा।

विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार, प्रतिमा मालवा क्षेत्र में पाए जाने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर से बनी है। उन्होंने बताया कि परमार काल और राजा भोज के समय इस क्षेत्र में बेसाल्ट पत्थर पर मूर्तियां बनाने की परंपरा रही है। हालांकि प्रतिमा पर काफी मात्रा में सिंदूर लगा होने के कारण उसका मूल स्वरूप स्पष्ट नहीं है। इसकी सही आयु जानने के लिए वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी है। प्रशासन ने प्रतिमा के आधार की स्थिति जानने के लिए उसके नीचे करीब डेढ़ फीट गहरा गड्ढा भी खोदा है। अब आर्कियोलॉजिस्ट की टीम अत्याधुनिक तकनीक से प्रतिमा के आधार, अंदरूनी संरचना और आसपास की मिट्टी की स्कैनिंग करेगी। स्कैनिंग रिपोर्ट आने के बाद ही प्रतिमा को हटाने के लिए अगली तकनीक तय की जाएगी।

पहले प्रतिमा को हटाने के लिए क्रेन, जेसीबी और अन्य भारी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन सभी प्रयास नाकाम रहे। विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि ज्यादा बल लगाने से प्रतिमा में दरार आ सकती है या वह खंडित हो सकती है। इसलिए फिलहाल भारी मशीनरी का इस्तेमाल रोक दिया गया है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सलाह लेने की तैयारी है। प्रशासन की योजना प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से टंकी चौक पर स्थापित करने की है। वहीं मंदिर के पुजारी और स्थानीय श्रद्धालु प्रतिमा को मौजूदा स्थान से हटाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि मंदिर का इतिहास काफी पुराना है और इसे हटाने के बजाय इसी स्थान पर भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए।

अब मामला आस्था, ऐतिहासिक विरासत और विकास के बीच फंस गया है। सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण जरूरी माना जा रहा है, लेकिन प्रतिमा की सुरक्षा भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे में सभी की नजरें विशेषज्ञों की स्कैनिंग रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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