भारत और चेक गणराज्य के बीच रक्षा साझेदारी मजबूत करने पर जोर, ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा

भारत और चेक गणराज्य ने रक्षा उद्योग में आपसी सहयोग को विस्तार देने पर सहमति जताई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चेक गणराज्य के उप प्रधानमंत्री एवं उद्योग-व्यापार मंत्री कारेल हवलीचेक की बैठक में संयुक्त रक्षा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने पर चर्चा हुई।

Knews Desk- भारत दौरे पर आए चेक गणराज्य के उप प्रधानमंत्री कारेल हवलीचेक ने मंगलवार को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक के दौरान दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और विभिन्न संयुक्त उपक्रमों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। दोनों पक्षों ने रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर सहमति जताई।

इस सहयोग का प्रमुख उद्देश्य ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की पहल को प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही दोनों देशों ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया। नेताओं ने कहा कि भारत और चेक गणराज्य के संबंध साझा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत, आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित हैं।

बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि कारेल हवलीचेक के साथ रक्षा औद्योगिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। उन्होंने संयुक्त उपक्रमों की प्रगति और उपलब्धियों पर संतोष जताया। साथ ही भारत-चेक संयुक्त रक्षा समिति के माध्यम से सहयोग को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत को प्रोत्साहित करने पर सहमति बनने की बात कही।

15 अक्टूबर तक भारत में रहेंगे कारेल हवलीचेक

चेक गणराज्य के उप प्रधानमंत्री कारेल हवलीचेक 12 से 15 अक्टूबर 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस दौरान वह विभिन्न मंत्रालयों, व्यापारिक संगठनों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। उनके कार्यक्रम में बेंगलुरु और मुंबई के औद्योगिक केंद्रों का दौरा भी शामिल है।

इससे पहले 12 अक्टूबर को उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की थी। इन बैठकों में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बेहतर बनाने के लिए भारत में निर्मित विमानों के उत्पादन में साझेदारी की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। इसके अलावा टिकाऊ बुनियादी ढांचे, ग्रीन मोबिलिटी, ऊर्जा परिवर्तन और तकनीकी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

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