मिडिल ईस्ट तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप का आया बड़ा बयान—युद्ध बढ़ेगा या खत्म होगा, हालात तय करेंगे

डिजिटल डेस्क- पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम (सीजफायर) को लेकर अनिश्चितता गहराती जा रही है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देकर हालात को और संवेदनशील बना दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि मौजूदा सीजफायर आगे बढ़ेगा या नहीं, यह पूरी तरह जमीनी हालात और चल रही बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगा। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर तय समयसीमा तक कोई ठोस समझौता नहीं हो पाता है, तो संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने की संभावना कम हो सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे क्षेत्र में तनाव पहले से ही चरम पर है और किसी भी छोटे घटनाक्रम से हालात बिगड़ सकते हैं।

नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी- ट्रंप

ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी। उन्होंने संकेत दिया कि भले ही सीजफायर को लेकर फैसला लंबित हो, लेकिन सैन्य दबाव बनाए रखा जाएगा। ट्रंप ने कहा, “शायद मैं इसे आगे न बढ़ाऊं, लेकिन नाकाबंदी जारी रहेगी। अगर समझौता नहीं हुआ, तो हमें फिर से कार्रवाई करनी पड़ सकती है।” इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका किसी भी स्थिति के लिए तैयार है और जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प फिर से अपनाया जा सकता है। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच लागू मौजूदा संघर्ष विराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश किसी नए समझौते पर पहुंच पाते हैं या फिर एक बार फिर तनाव बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत विफल रहती है, तो क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका बढ़ सकती है।

इस्लामाबाद में फिर बैठ सकते हैं ईरान और अमेरिका

इसी कड़ी में दोनों देशों के बीच एक और वार्ता की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मुलाकात कर सकते हैं। इस बातचीत का उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने और किसी स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है। इससे पहले 11 से 12 अप्रैल के बीच इस्लामाबाद में हुई वार्ता को ऐतिहासिक जरूर माना गया था, लेकिन उससे कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया। यह बातचीत इसलिए भी खास थी क्योंकि 1979 की ईरानी क्रांति के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच इतनी उच्च स्तरीय सीधी वार्ता हुई थी। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों पक्ष किसी निर्णायक समझौते तक नहीं पहुंच सके।

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