CJP प्रोटेस्ट: छात्रों को FIR से राहत दिलाने की तैयारी, सरकार ने SC का रुख किया

KNEWS DESK- जुलाई में पेपर लीक के आरोपों को लेकर देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था. इन प्रदर्शनों के दौरान कई छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थीं. छात्र संगठनों की ओर से आंदोलन खत्म करने के लिए इन मामलों को वापस लेने की मांग की गई थी. अब केंद्र सरकार ने इन FIR को खत्म कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है.

अनुच्छेद 142 के तहत मांगी जाएगी राहत

सरकार सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दाखिल करेगी, जिसमें प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत कोर्ट की विशेष शक्ति का इस्तेमाल करने की मांग की जाएगी. अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में ‘पूर्ण न्याय’ (Complete Justice) करने के लिए जरूरी आदेश जारी करने की शक्ति देता है. कोर्ट इस प्रावधान का इस्तेमाल ऐसे मामलों में कर सकता है, जहां सामान्य कानूनी प्रक्रिया से न्याय के उद्देश्य को पूरी तरह हासिल करना मुश्किल हो.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार खुद अनुच्छेद 142 के जरिए FIR खत्म कर सकती है. इस मामले में सरकार को सुप्रीम कोर्ट से आदेश की जरूरत होगी और अंतिम फैसला कोर्ट ही करेगा.

2,873 लोगों को क्यों नहीं मिलेगी राहत?

इस मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि प्रस्तावित राहत सभी 2,873 लोगों पर लागू नहीं होगी. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जुलाई के प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में लोग आरोपी बनाए गए थे. सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जिस राहत की मांग की जा रही है, उसका दायरा और पात्रता कोर्ट के सामने रखे गए आवेदन और उसके आदेश पर निर्भर करेगी.

यानी केवल FIR दर्ज होने भर से हर आरोपी को स्वतः राहत मिलना तय नहीं है. जिन मामलों में गंभीर या अलग प्रकृति के आरोप हैं, उनमें अलग कानूनी प्रक्रिया लागू हो सकती है.

5 सितंबर को फिर मार्च का ऐलान

केंद्र सरकार की यह पहल ऐसे समय सामने आई है, जब CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में दोबारा विरोध मार्च करने का ऐलान किया है. जुलाई में पेपर लीक के आरोपों को लेकर हुए आंदोलन के बाद छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग आंदोलन से जुड़े प्रमुख मुद्दों में रही थी.

अब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल करने का फैसला इस विवाद को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

क्या है अनुच्छेद 142?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश और निर्देश जारी करने की विशेष शक्ति देता है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल तकनीकी कानूनी प्रक्रिया के कारण किसी पक्ष को न्याय से वंचित न रहना पड़े.

हालांकि, इस शक्ति का इस्तेमाल असाधारण परिस्थितियों में किया जाता है और यह सामान्य कानूनी प्रक्रिया का विकल्प नहीं है. इस मामले में भी FIR खत्म करने या राहत देने का अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट के हाथ में होगा.

अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है, क्योंकि उसके फैसले से जुलाई के छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों और 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च, दोनों पर असर पड़ सकता है.

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