KNEWS DESK– नीट पेपर लीक के विरोध में दिल्ली में आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर व्यापक जांच शुरू कर दी है। पुलिस का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रदर्शन के दौरान हालात कैसे बिगड़े, हिंसा की शुरुआत किसने की और क्या इस आंदोलन में बाहरी तत्वों की कोई भूमिका थी। जांच के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा वीडियो, सोशल मीडिया सामग्री और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का सहारा ले रही है।
सोमवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने लगे। प्रदर्शन पिछले लगभग एक महीने से चल रहा था और इसमें मुख्य रूप से नीट पेपर लीक के विरोध में छात्र शामिल थे। जैसे ही प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े, सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए संसद भवन के मुख्य प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए।
सूत्रों के मुताबिक, इस घटना में 60 से अधिक प्रदर्शनकारी और 100 से ज्यादा पुलिस एवं सुरक्षा बलों के जवान घायल हुए हैं। हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि घटना के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध सभी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाएगा। इस प्रदर्शन के पीछे कई प्रमुख मांगें थीं। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अस्पताल से रिहाई, तथा नीट परीक्षा से जुड़े कथित घटनाक्रम के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग की जा रही थी। इन्हीं मांगों को लेकर प्रदर्शनकारी संसद की ओर कूच कर रहे थे।
पहला, पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रदर्शन के दौरान सबसे पहले बैरिकेड किसने तोड़े और हिंसा की शुरुआत किसने की। जांच एजेंसियों को संदेह है कि प्रदर्शन में केवल छात्र ही नहीं बल्कि अन्य समूहों के लोग भी शामिल थे। इसी वजह से यह संभावना भी जांच के दायरे में है कि कहीं किसी बाहरी समूह ने प्रदर्शन को अपने उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने या भीड़ को उकसाने की कोशिश तो नहीं की।
दूसरा, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की फॉरेंसिक जांच की जाएगी। पुलिस यह सत्यापित करना चाहती है कि वायरल वीडियो वास्तविक हैं या उनमें किसी प्रकार की एडिटिंग, छेड़छाड़ अथवा भ्रामक प्रस्तुति की गई है। जांच के दौरान वीडियो का समय, स्थान और घटनाक्रम का मिलान अन्य डिजिटल साक्ष्यों से किया जाएगा।
तीसरा, प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान के लिए घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, ड्रोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो और पुलिस कर्मियों के बॉडी कैमरा फुटेज का विश्लेषण किया जाएगा। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि हिंसा में कौन-कौन लोग सक्रिय रूप से शामिल थे और घटनास्थल पर उनकी गतिविधियां क्या थीं।
चौथा, पुलिस यह जांच करेगी कि क्या किसी संगठन, समूह या बाहरी तत्व ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने या हिंसा भड़काने का प्रयास किया। इसके लिए घटनास्थल से मिले मोबाइल डेटा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, डिजिटल साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। यदि किसी संगठित साजिश के संकेत मिलते हैं तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल दिल्ली पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हिंसा अचानक भड़की या इसके पीछे कोई सुनियोजित प्रयास था। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध सभी तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किया जाएगा ताकि घटना की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके।