डिजिटल डेस्क- पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया है। विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड बहुमत हासिल कर ममता बनर्जी के दस साल के शासन का अंत कर दिया है। जहाँ एक ओर भाजपा खेमे में जश्न का माहौल है, वहीं दूसरी ओर चुनाव परिणामों के बाद राज्य के कई जिलों में भीषण हिंसा भड़क उठी है। इस राजनीतिक टकराव में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों दफ्तरों में तोड़फोड़ की खबरें हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। वहीं, सत्ता से बाहर हुई तृणमूल कांग्रेस (TMC) केवल 80 सीटों पर सिमट कर रह गई है। इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला परिणाम भवानीपुर सीट से आया, जहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अपनी सीट नहीं बचा पाईं। उन्हें भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने 15,114 वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी। राज्य में अब भाजपा की पहली सरकार बनने जा रही है और 9 मई को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा।
हिंसा का तांडव और चार हत्याएं
चुनाव के नतीजे आते ही 4 मई से बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा का दौर शुरू हो गया। पुलिस और रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक हिंसा की घटनाओं में 4 लोगों की जान जा चुकी है। कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में विजय जुलूस के दौरान भाजपा कार्यकर्ता मधु मंडल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। वहीं, बीरभूम के नानूर में टीएमसी कार्यकर्ता अबीर शेख की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई। संदेशखाली में देर रात गश्त पर निकली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की टीम पर बदमाशों द्वारा फायरिंग की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर ला दिया है।
टीएमसी दफ्तरों पर हमला और आगजनी
राज्य भर में राजनीतिक प्रतिशोध की आग साफ देखी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक लगभग 400 से ज्यादा स्थानों पर टीएमसी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई है। आसनसोल, हावड़ा, टॉलीगंज, कसबा, बरुईपुर, कमरहाटी, बारानगर और बहरामपुर जैसे इलाकों में टीएमसी दफ्तरों को निशाना बनाया गया। आसनसोल के कोर्ट मोड़ इलाके में स्थित टीएमसी के एक दफ्तर को देर रात आग के हवाले कर दिया गया। हिंसा की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने 10 सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है जो इन मामलों की जांच करेगी।