कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को निजी हित से ज्यादा अहम मानते हुए 10 दिन की अंतरिम जमानत की मांग खारिज कर दी. हालांकि, मानवीय आधार पर आरोपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बहन की शादी में शामिल होने की अनुमति दी गई है.
KNews Desk: जम्मू की विशेष NIA अदालत ने 2019 के पुलवामा आतंकी हमले के आरोपी मोहम्मद इकबाल राथर की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. इकबाल ने अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए 5 से 10 सितंबर के बीच 10 दिन की अस्थायी रिहाई की मांग की थी.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं आरोपी के निजी हित से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं. हालांकि, अदालत ने मानवीय आधार पर उसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बहन की शादी में वर्चुअली शामिल होने की अनुमति दे दी.
2020 में गिरफ्तार हुआ था इकबाल
मोहम्मद इकबाल राथर जम्मू-कश्मीर के बडगाम का रहने वाला है. NIA ने उसे जुलाई 2020 में पुलवामा आतंकी हमले की साजिश से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसी के मुताबिक, उस पर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सदस्य और हमले के मुख्य साजिशकर्ता मोहम्मद उमर फारूक की आवाजाही में मदद करने का आरोप है.
जांच के अनुसार, उमर फारूक अप्रैल 2018 में जम्मू क्षेत्र के रास्ते भारतीय सीमा में दाखिल हुआ था. आरोप है कि उसने अन्य आतंकियों के साथ मिलकर पुलवामा हमले में इस्तेमाल किए गए IED को तैयार किया था. इकबाल पर सुरक्षित मैसेजिंग ऐप के जरिए पाकिस्तान में मौजूद JeM के आकाओं के संपर्क में रहने का भी आरोप है.
पुलवामा हमले में शहीद हुए थे 40 CRPF जवान
14 फरवरी 2019 को दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में CRPF के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था. विस्फोटकों से भरी कार को जवानों के काफिले से टकराकर किए गए इस हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे. इस मामले की साजिश की जांच NIA को सौंपी गई थी.
इससे पहले जम्मू की विशेष NIA अदालत ने 2019 के किश्तवाड़ हथियार छीनने के मामले में आतंकी सहयोगी तनवीर अहमद मलिक की जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी.
यह मामला मार्च 2019 का है, जब हथियारबंद हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर के एस्कॉर्ट इंचार्ज से एक AK-47 राइफल, तीन मैगजीन और 90 जिंदा कारतूस छीन लिए थे.