Knews Desk– अगस्त महीने की शुरुआत वैश्विक बाजारों के लिए राहत भरी खबर लेकर आई है। जुलाई में भू-राजनीतिक तनाव के चलते 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने वाला कच्चा तेल अब तेजी से नीचे आ गया है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 84 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में आई नरमी मानी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई टालने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के संकेतों ने निवेशकों को राहत दी है।
जुलाई के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की आशंकाओं, ओमान के पास तेल टैंकरों पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े सुरक्षा संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 20 फीसदी से ज्यादा उछाल आया था। उस समय बाजार को डर था कि अगर तेल आपूर्ति बाधित हुई तो कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। हालांकि अगस्त की शुरुआत के साथ ही हालात बदलते नजर आए और तेल बाजार में बिकवाली बढ़ गई।रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि ईरान और मध्य-पूर्व के कुछ देशों ने नई डील को अंतिम रूप देने के लिए समय मांगा है। इस समझौते का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े खतरे को कम करना है। इस बयान के बाद निवेशकों ने माना कि फिलहाल सैन्य टकराव की संभावना कम हुई है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला।
हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। यदि ईरान दोबारा आक्रामक रुख अपनाता है या तेल टैंकरों और अमेरिकी ठिकानों पर हमले जैसी घटनाएं बढ़ती हैं, तो तेल की कीमतों में फिर से तेज उछाल देखने को मिल सकता है। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा अब भी वैश्विक बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है।इस बीच तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC+ ने भी सितंबर से उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। संगठन ने प्रतिदिन करीब 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन की मंजूरी दी है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान, रूस और यूक्रेन से जुड़े भू-राजनीतिक संकट के कारण इस अतिरिक्त उत्पादन का असर फिलहाल सीमित रह सकता है। फिर भी उत्पादन बढ़ाने के फैसले ने बाजार में सप्लाई को लेकर भरोसा बढ़ाया है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
भारत के उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले लगभग 70 दिनों से ईंधन के दाम स्थिर रखे हैं। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में पेट्रोल अब भी 110 रुपये प्रति लीटर के आसपास या उससे ऊपर बना हुआ है।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और OPEC+ की उत्पादन नीति ही तय करेगी कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहेगी या फिर बाजार एक बार फिर महंगाई की नई लहर का सामना करेगा। फिलहाल अगस्त की शुरुआत ने वैश्विक बाजारों को राहत जरूर दी है, लेकिन आगे की दिशा पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।