14 साल पहले जिस जमीन के लिए यूसुफ पठान ने आवेदन किया था, गुजरात सरकार ने अब उसके आवंटन को मंजूरी दे दी है। वडोदरा में 978 वर्ग मीटर के विवादित प्लॉट की अनुमानित कीमत 20.53 करोड़ रुपये है। जमीन आवंटन का फैसला ऐसे समय आया है, जब पठान ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का रुख किया। हालांकि, जमीन का आवंटन अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंचा है।
Knews Desk– पूर्व भारतीय क्रिकेटर और पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान को गुजरात सरकार से बड़ी राहत मिली है। 19 अक्टूबर 2026 को गुजरात सरकार ने वडोदरा के तांदलजा इलाके में 978 वर्ग मीटर के विवादित प्लॉट को पठान को आवंटित करने की मंजूरी दे दी। इस जमीन को लेकर विवाद करीब 14 साल पुराना है। साल 2012 में पठान ने वडोदरा नगर निगम (VMC) से इस प्लॉट को 99 साल की लीज पर देने की मांग की थी। हालांकि, 2014 में राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
जमीन का विवाद कैसे शुरू हुआ?
यूसुफ पठान ने साल 2012 में आवेदन के दौरान दो प्रमुख कारण बताए थे।
♦ वह एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हैं और उन्हें सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं।
♦ उनके पारिवारिक बंगले से सटी यह जमीन आवासीय इस्तेमाल के लिए सुविधाजनक रहेगी।
वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति और सामान्य सभा ने बिना सार्वजनिक नीलामी के जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार के पास भेजा था। लेकिन जून 2014 में शहरी विकास विभाग ने प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि कीमती जमीन के आवंटन के लिए सार्वजनिक नीलामी या खुली बोली जरूरी है।
प्रस्ताव खारिज होने के बाद नगर निगम ने आरोप लगाया कि यूसुफ पठान ने जमीन पर बाड़ लगाकर कब्जा कर लिया था। जून 2024 में जब पठान पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर सांसद बने, तब यह मामला फिर चर्चा में आया। इसी दौरान वडोदरा नगर निगम ने उन्हें अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया।
पठान ने इस नोटिस को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनके वकीलों ने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को जमीन आवंटित करने वाली सरकारी नीति का हवाला दिया, जबकि नगर निगम ने जमीन पर अपना अधिकार बताया।
TMC छोड़ने के बाद कैसे बदला घटनाक्रम?
इस पूरे मामले में साल 2026 का घटनाक्रम खास माना जा रहा है। जून 2026 में पश्चिम बंगाल में BJP की जीत के बाद यूसुफ पठान उन 20 TMC सांसदों में शामिल थे, जिन्होंने पार्टी छोड़कर NCPI में विलय कर लिया। इसके बाद पठान को NCPI का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया।
इसके बाद घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा।
♦ 13 अगस्त 2026 को गुजरात सरकार ने जमीन आवंटन से संबंधित प्रस्ताव पारित किया।
♦ 29 अगस्त को यह प्रस्ताव वडोदरा नगर निगम तक पहुंचा।
♦ 31 अगस्त को यूसुफ पठान ने गुजरात हाईकोर्ट से अपनी अपील वापस ले ली।
♦ 19 अक्टूबर 2026 को गुजरात सरकार ने विवादित प्लॉट के आवंटन को मंजूरी दे दी।
राजनीतिक घटनाक्रम और सरकारी मंजूरी के बीच सामने आए इस क्रम को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
कितने करोड़ रुपये की जमीन मिलने का रास्ता साफ हुआ?
गुजरात सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक, 978 वर्ग मीटर के कुल प्लॉट में से 500 वर्ग मीटर जमीन यूसुफ पठान को आवासीय इस्तेमाल के लिए मुफ्त दी जाएगी। वहीं, बाकी 478 वर्ग मीटर जमीन का हस्तांतरण निर्धारित मूल्य के 55 प्रतिशत पर किया जाएगा। यानी इस हिस्से पर 45 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
वडोदरा नगर निगम ने जुलाई 2026 में इस जमीन का मूल्यांकन 2.10 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर किया था। इस हिसाब से पूरे प्लॉट की अनुमानित कीमत करीब 20.53 करोड़ रुपये बैठती है।
♦ कुल जमीन: 978 वर्ग मीटर।
♦ मुफ्त आवंटित होने वाली जमीन: 500 वर्ग मीटर।
♦ रियायती दर पर मिलने वाली जमीन: 478 वर्ग मीटर।
♦ पूरे प्लॉट की अनुमानित कीमत: 20.53 करोड़ रुपये।
♦ मुफ्त मिलने वाली जमीन की अनुमानित कीमत: करीब 10.5 करोड़ रुपये।
इस तरह पठान को लगभग 10.5 करोड़ रुपये की जमीन मुफ्त मिलने का रास्ता साफ हुआ है। इसके अलावा, बाकी जमीन भी उन्हें निर्धारित मूल्य से 45 प्रतिशत कम कीमत पर मिलेगी।
सरकार ने क्यों कहा कि यह मिसाल नहीं बनेगी?
गुजरात सरकार ने अपने प्रस्ताव में स्पष्ट किया है कि इस आवंटन को भविष्य के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा। साथ ही, राजस्व विभाग वडोदरा नगर निगम को इस जमीन के बराबर मूल्य की दूसरी जमीन मुआवजे के तौर पर आवंटित करेगा। इस शर्त को फैसले की विशेष प्रकृति से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या यूसुफ पठान को अभी जमीन मिल गई है?
फिलहाल, जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। वडोदरा के नगर आयुक्त अरुण महेश बाबू के मुताबिक, नगर निगम को राज्य सरकार की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन विस्तृत शर्तें तय होनी बाकी हैं।
♦ प्रस्ताव को पहले नगर निगम की स्थायी समिति से मंजूरी लेनी होगी।
♦ इसके बाद इसे सामान्य सभा के सामने रखा जाएगा।
♦ इन मंजूरियों के बाद ही आवंटन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सकेगा।
इस पूरे मामले का राजनीतिक पहलू भी चर्चा में है। साल 2014 में जमीन आवंटन का प्रस्ताव खारिज हुआ था, 2024 में अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया गया और 2026 में राजनीतिक बदलाव के बाद आवंटन को मंजूरी मिली। इन घटनाओं के क्रम ने फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, जमीन आवंटन के फैसले और यूसुफ पठान के राजनीतिक बदलाव के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।