KNEWS DESK- नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन अब राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस, को सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। इसी क्रम में कांग्रेस ने आज देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी के सभी सांसद और नेता काली पट्टी बांधकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेस का कहना है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार जवाबदेह है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक जोर-शोर से उठाने की रणनीति बनाई है। पार्टी लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि पेपर लीक जैसी गंभीर घटनाओं ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और सरकार इस मामले में पूरी तरह विफल रही है।
मंगलवार को कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, के.सी. वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने सभी नेताओं को हिरासत में लिया, हालांकि कुछ समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
आज सुबह 10 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर इंडिया ब्लॉक के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में संसद के भीतर और बाहर सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान विपक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगा और सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखेगा।
कांग्रेस ने अपनी सभी राज्य इकाइयों को विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी के अनुसार, देशभर में अलग-अलग राज्यों में मार्च निकाले जाएंगे, गांधी प्रतिमा के सामने धरना दिया जाएगा, नेता और कार्यकर्ता काली पट्टी या काले कपड़े पहनेंगे तथा पोस्टर और बैनर के माध्यम से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। कुछ स्थानों पर सांकेतिक विरोध के तौर पर ताश खेलकर भी सरकार पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया जाएगा। पार्टी का उद्देश्य इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर जन आंदोलन का रूप देना है।
संसद के मानसून सत्र के पहले दो दिन भी नीट पेपर लीक के मुद्दे पर भारी हंगामे की भेंट चढ़ चुके हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार इस मामले पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार को परीक्षा प्रणाली में हुई कथित गड़बड़ियों पर जवाब देना चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी लगातार दोहराई जा रही है।
दूसरी ओर, दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। छात्र संगठनों के बैनर तले बड़ी संख्या में युवा अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
नीट पेपर लीक का मुद्दा अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बन चुका है। विपक्ष इसे सरकार की जवाबदेही से जोड़कर लगातार हमलावर है, जबकि सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।