भारत-रूस की दोस्ती का नया चैप्टर, रेलवे से लेकर डिजिटल करेंसी तक 100 अरब डॉलर का होगा कारोबार

KNEWS DESK– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक हुई। यह मुलाकात ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले हुई। बैठक में दोनों देशों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक संबंधों के साथ-साथ आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

भारत और रूस ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल दोनों देशों के बीच सालाना कारोबार करीब 60 अरब डॉलर का है। ऐसे में अगले चार वर्षों में व्यापार को लगभग 40 अरब डॉलर बढ़ाने की योजना है।

2030 तक व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य

भारत और रूस के बीच मौजूदा व्यापार में रूस से होने वाला कच्चे तेल का आयात बड़ी भूमिका निभाता है। अब दोनों देश कारोबार को केवल तेल और ऊर्जा तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि नए क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 10 सितंबर को कहा था कि 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देशों के व्यापार में लगातार दोहरे अंकों की सालाना वृद्धि जरूरी होगी। इसके लिए नए कारोबारी क्षेत्रों की पहचान, बाजार तक बेहतर पहुंच और रूस में भारतीय उत्पादों की बिक्री बढ़ाने पर काम किया जा सकता है।

रेलवे से स्टील तक बढ़ेगा सहयोग

भारत और रूस के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ाना बैठक का अहम मुद्दा रहा। नई दिल्ली में आयोजित INNOPROM ट्रेड फेयर को दोनों देशों की कंपनियों के बीच नई साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।

रेलवे, टनल निर्माण और स्टील सेक्टर की पूरी वैल्यू चेन में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसके अलावा दोनों देशों की कंपनियों के बीच सीधे बिजनेस अवसर बढ़ाने और रूस के बाजार में भारतीय सामान की पहुंच आसान बनाने पर भी जोर दिया गया।

परमाणु ऊर्जा में नई संभावनाएं

भारत और रूस सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में भी सहयोग मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस साझेदारी में परमाणु ईंधन की आपूर्ति, तकनीकी सहयोग और न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स को लंबे समय तक सहायता देने जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।

दोनों देशों के लिए परमाणु ऊर्जा स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

रूस में बढ़ सकते हैं भारतीय कुशल कामगार

बैठक में भारतीय स्किल्ड वर्कर्स के रूस जाने का मुद्दा भी सामने आया। दोनों देश ऐसा सिस्टम तैयार करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे ज्यादा कुशल भारतीय कामगार

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