20 साल में सड़कों पर बढ़े 32 करोड़ वाहन, 2026 में नई नीति लाने की सिफारिश

Knews Desk- देश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या में भारी इजाफे के बीच परिवहन विशेषज्ञों ने नई और व्यापक शहरी परिवहन नीति की जरूरत पर जोर दिया है। इसी दिशा में इंडियन स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी (ISPP) ने वर्ष 2006 में लागू राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति की समीक्षा प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है।

वर्ष 2006 में देश में पंजीकृत वाहनों की संख्या करीब 9 करोड़ थी, जो 2025 तक बढ़कर 41.3 करोड़ से अधिक हो गई है। यानी पिछले दो दशकों में लगभग 32 करोड़ नए वाहन सड़कों पर आए हैं। वाहनों की इस तेज वृद्धि ने शहरों की यातायात व्यवस्था, सड़क नेटवर्क और सार्वजनिक परिवहन पर भारी दबाव डाल दिया है।

यह समीक्षा ISPP के सेंटर फॉर अर्बन ट्रांजिशन (ICUT) के माध्यम से की जा रही है। समीक्षा में शामिल विशेषज्ञों ने पाया कि 2006 की नीति का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन और गैर-मोटर चालित साधनों जैसे साइकिल और पैदल यातायात को बढ़ावा देना था, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई शहरों में मेट्रो रेल परियोजनाओं को प्राथमिकता तो दी गई, लेकिन उन्हें अन्य परिवहन साधनों और भूमि उपयोग योजनाओं के साथ प्रभावी ढंग से नहीं जोड़ा गया। इसके अलावा पार्किंग प्रबंधन, शहरी माल परिवहन, छोटे शहरों की परिवहन जरूरतों, ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि बदलती परिस्थितियों और तकनीकी विकास को ध्यान में रखते हुए 2026 में नई शहरी परिवहन नीति लागू की जानी चाहिए। ISPP के डीन और सह-संस्थापक डॉ. पार्थ शाह ने कहा कि भारत में अब तक कोई समग्र शहरीकरण नीति नहीं रही है। उन्होंने कहा कि शहरों को लंबे समय तक विकास की प्राथमिकताओं में पीछे रखा गया, जिसके कारण परिवहन से जुड़ी कई समस्याएं आज और गंभीर रूप ले चुकी हैं।

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