न होटल, न दिखावा, IIT प्रोफेसर का बर्थडे बना इंसानियत और अपनापन की मिसाल

Knews Desk- आज के समय में जहां जन्मदिन का मतलब बड़े होटल, महंगे केक और भव्य पार्टियों से जोड़ दिया गया है, वहीं IIT खड़गपुर के प्रोफेसर अरबिंद राउत्रे ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। उनका जन्मदिन मनाने का तरीका इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों के दिलों को छू रहा है। आमतौर पर लोग अपने खास दिन पर गिफ्ट्स और ग्रैंड सेलिब्रेशन की उम्मीद करते हैं, लेकिन प्रोफेसर राउत्रे ने अपने जन्मदिन को अपने छात्रों के साथ बेहद सादगी और अपनत्व के साथ मनाने का फैसला किया। उन्होंने किसी फाइव-स्टार होटल या बड़े रेस्टोरेंट की जगह कॉलेज कैंपस के एक साधारण गार्डन को चुना।

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वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रोफेसर अपने छात्रों के साथ जमीन पर बैठकर और खुले माहौल में खाना खाते हुए नजर आ रहे हैं। वहां किसी तरह की औपचारिकता या दिखावा नहीं था, बल्कि एक सच्चा और सहज माहौल था, जिसमें गुरु और शिष्य के बीच का रिश्ता साफ झलक रहा था। खाने की बात करें तो मेनू भी बिल्कुल घरेलू और सादा था पास्ता, पूरी, चावल, दाल, अलग-अलग तरह की सब्जियां और मिठाई में आइसक्रीम। छात्र इस दावत का आनंद लेते नजर आए, कोई जमीन पर बैठा था तो कोई खड़े होकर खाना खा रहा था। लेकिन हर चेहरे पर खुशी और संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

इस पूरे आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि प्रोफेसर ने खुद को छात्रों से अलग नहीं रखा, बल्कि उनके बीच बैठकर उसी तरह समय बिताया जैसे परिवार के साथ बिताया जाता है। यही वजह है कि यह वीडियो लोगों को इतना पसंद आ रहा है।इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर @unseen_iit नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है, जहां इसे हजारों लोग देख चुके हैं और लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई यूजर्स ने प्रोफेसर की सादगी और विनम्रता की जमकर तारीफ की है।

एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “मेरे प्रोफेसर तो कह रहे हैं कि यह वीडियो AI से बनाया गया है।” वहीं, एक अन्य यूजर ने भावुक होकर लिखा, “मैंने इनके अंडर पीएचडी की है, ये सच में ऐसे ही हैं। यह घटना सिर्फ एक बर्थडे सेलिब्रेशन नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि असली खुशी दिखावे में नहीं, बल्कि सादगी और रिश्तों में होती है। प्रोफेसर राउत्रे ने अपने इस छोटे से कदम से यह साबित कर दिया कि शिक्षक और छात्र का रिश्ता सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसमें सम्मान, अपनापन और इंसानियत भी शामिल होती है।

आज जब सोशल मीडिया पर दिखावे की दुनिया हावी है, ऐसे में यह कहानी एक ताजा हवा के झोंके की तरह है जो याद दिलाती है कि सच्ची खुशी साधारण पलों में छिपी होती है।

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