अलीगढ़ कॉलेज में बंदरों के आतंक से राहत, लंगूर ‘गोलू’ बना अनोखा सुरक्षा गार्ड

Knews Desk अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) के डीएस डिग्री कॉलेज में बंदरों के बढ़ते आतंक से निपटने के लिए एक अनोखा और चर्चा में आया तरीका अपनाया गया है। कॉलेज प्रशासन ने एक लंगूर को “गार्ड” के रूप में नियुक्त किया है, जिसका नाम ‘गोलू’ रखा गया है। इस लंगूर की तैनाती के बाद से परिसर में बंदरों की समस्या काफी हद तक कम हो गई है।

बंदरों के आतंक से परेशान था कॉलेज

रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज परिसर में लंबे समय से बंदरों का झुंड छात्रों और स्टाफ के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ था। कई बार छात्र-छात्राओं को डर के कारण रास्ता बदलना पड़ता था और क्लास तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था। बंदर कभी सामान छीन लेते थे, तो कभी लोगों को दौड़ा लेते थे।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि कॉलेज प्रशासन को कोई नया समाधान तलाशना पड़ा। इसी दौरान उन्होंने एक प्रशिक्षित लंगूर को सुरक्षा के लिए रखने का फैसला किया।

लंगूर ‘गोलू’ की तैनाती

कॉलेज ने ‘गोलू’ नाम के लंगूर को सुरक्षा गार्ड की तरह नियुक्त किया है। उसे लगभग 12 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है और उसकी ड्यूटी सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक रहती है। इस दौरान वह पूरे कैंपस में गश्त करता है और जैसे ही बंदरों का झुंड दिखाई देता है, वे डरकर वहां से भाग जाते हैं।

कॉलेज प्रशासन के अनुसार, इस प्रयोग के बाद से परिसर में बंदरों का उत्पात काफी कम हो गया है और छात्र अब पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

छात्रों और स्टाफ को मिली राहत

लंगूर की मौजूदगी से छात्रों और शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। पहले जो छात्र डर के कारण कक्षाओं में नहीं जा पाते थे, अब वे बिना डर के कैंपस में आ-जा पा रहे हैं। कॉलेज में ‘गोलू’ के साथ सेल्फी लेने का चलन भी शुरू हो गया है, जिससे यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आ गया है।

अनोखा लेकिन असरदार समाधान

प्राचार्य का कहना है कि यह प्रयोग पिछले लगभग छह महीनों से सफलतापूर्वक चल रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। यह घटना यह भी दिखाती है कि पारंपरिक समस्याओं के लिए कभी-कभी अनोखे और रचनात्मक समाधान भी कारगर साबित हो सकते हैं।

अलीगढ़ का यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि बंदरों की समस्या से निपटने के लिए लंगूर को “नौकरी” पर रखना एक असामान्य लेकिन प्रभावी तरीका साबित हुआ है। इससे न केवल सुरक्षा बढ़ी है, बल्कि छात्रों का जीवन भी पहले से अधिक सहज हो गया है।

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