सोनिया गांधी ने खोले कई पुराने राज, इमरजेंसी से लेकर 2004 में PM पद ठुकराने तक पर खुलकर बोलीं

सोनिया गांधी अपनी नई किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ में निजी जिंदगी से लेकर राजनीति तक के कई अहम पहलुओं पर बात करती नजर आएंगी। किताब के लॉन्च से पहले दिए इंटरव्यू में उन्होंने राजीव गांधी, इंदिरा गांधी, इमरजेंसी, विदेशी मूल के विवाद और 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार न करने के फैसले समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।

Knews Desk – सोनिया गांधी ने अपनी आने वाली किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ में अपनी जिंदगी और राजनीतिक सफर से जुड़े कई पहलुओं पर खुलकर बात की है। किताब में राजीव गांधी से मुलाकात और प्रेम, शादी, इंदिरा गांधी से उनके रिश्ते, राजीव गांधी की हत्या के बाद राजनीति में आने और कांग्रेस अध्यक्ष बनने से जुड़े अनुभवों का जिक्र किया गया है।

इमरजेंसी पर बोलीं सोनिया गांधी

इमरजेंसी के सवाल पर सोनिया गांधी ने कहा कि आम लोगों की नजर में संजय गांधी को अक्सर इमरजेंसी का पर्याय माना जाता है, लेकिन उस समय इंदिरा गांधी पर उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का भी दबाव था। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी की अपनी अलग राय थी और बाद में इंदिरा गांधी ने हालात को समझते हुए स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाए।

सोनिया गांधी ने भारत आने के बाद राजीव गांधी और इंदिरा गांधी से मिले अनुभवों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि साहस, दूसरों के प्रति संवेदना, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भारत के प्रति प्रतिबद्धता और कर्तव्य की भावना ने उनके जीवन और नजरिए को प्रभावित किया।

सोनिया गांधी ने अपनी किताब में RSS और BJP का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने संवैधानिक मूल्यों और लोगों को बिना डर अपने धर्म और आस्था का पालन करने के अधिकार के समर्थन में दृढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दोनों अलग-अलग वैचारिक दुनिया से आते हैं और भारत को लेकर उनके विचार अलग हैं।

विदेशी मूल के विवाद पर छलका पुराना दर्द

विदेशी मूल के विवाद को याद करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि जब कांग्रेस नेताओं शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने उनके विदेशी मूल का मुद्दा उठाया, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए थे और वह बैठक से बाहर चली गई थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का दुख था कि भारत के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल उठाए जा रहे थे।

सोनिया गांधी ने 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार न करने के फैसले पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले उन्होंने अपने एक बच्चे से कहा था कि वह प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करेंगी। बाद में पार्टी नेताओं के दबाव में उन्होंने हामी तो भर दी, लेकिन अपना फैसला बदल लिया। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

सोनिया गांधी ने कहा कि उनके और मनमोहन सिंह के बीच भूमिकाएं स्पष्ट थीं और दोनों ने एक टीम के रूप में काम किया। उन्होंने बताया कि सरकार का नेतृत्व डॉ. सिंह कर रहे थे, जबकि वह पार्टी की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

BJP-RSS से समझौते पर साफ किया रुख

राजनीतिक समझौतों को लेकर सोनिया गांधी ने कहा कि राजनीति में कई बार व्यावहारिक होकर समझौते करने पड़ते हैं और कुछ मौकों पर अलग विचारधारा वाले लोगों के साथ भी हाथ मिलाना पड़ा। हालांकि उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी BJP और RSS के साथ समझौता नहीं किया और न ही करेगी।

2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर सोनिया गांधी ने कहा कि पिछले बारह वर्षों में देश के ढांचे, लोकतंत्र और संस्थाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बाद भी व्यवस्थाओं को दोबारा पटरी पर लाने में समय लगेगा और इसके लिए राजनीतिक दलों को मेहनत करनी होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि वह आशावादी हैं और उन्हें भारत की जनता से बेहतर शासन व्यवस्था की वापसी की उम्मीद है।

कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर सोनिया गांधी ने कहा कि वह निराशावादी नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को समान अवसर नहीं मिला है। उन्होंने चुनाव आयोग, मुख्यधारा की मीडिया, पैसे और धर्म के इस्तेमाल को लेकर भी आरोप लगाए। सोनिया गांधी ने कहा कि इसके बावजूद कांग्रेस डटकर लड़ रही है और आगे बढ़ रही है।

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