KNEWS DESK- दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि केवल पाबंदियां लगाने और लगातार आदेश जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए लोगों के व्यवहार में बदलाव और पर्यावरण के प्रति जागरूकता जरूरी है। CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने 6 नवंबर को मामले की सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के दौरान प्रदूषण, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, ट्रैफिक जाम और पराली जलाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की। अदालत ने कहा कि त्योहार मनाते समय लोगों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और पुरानी परंपराओं की ओर लौटने पर भी विचार करना चाहिए।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली-NCR में वाहनों से होने वाला प्रदूषण बड़ी समस्या है। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि भारी ट्रैफिक और बंपर-टू-बंपर वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। केंद्र की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रदूषण रोकने के लिए कई उपाय किए गए हैं।
सुनवाई के दौरान पराली जलाने का मुद्दा भी उठा। अदालत को बताया गया कि 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान करीब 14 प्रतिशत रहा। CJI ने कहा कि बुवाई का मौसम चल रहा है और पराली जलाने की घटनाएं बंद होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि पराली प्रबंधन की मशीनें ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई जाएं, क्योंकि हर किसान के लिए महंगी मशीन खरीदना संभव नहीं है।
अदालत ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराने से भी आगाह किया। CJI ने कहा कि गरीब लोग प्रदूषण फैलाने वाले नहीं, बल्कि इसके शिकार होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। मामले की अगली सुनवाई दिवाली के बाद होगी।