गोकुल चुनाव में बदला सत्ता का गणित, CM फडणवीस के दांव से सतेज पाटील की बढ़ी मुश्किल

कोल्हापुर जिला दूध उत्पादक संघ यानी गोकुल के अध्यक्ष पद को लेकर महाराष्ट्र में सियासी घमासान तेज हो गया है। 25 निर्वाचित संचालकों वाले गोकुल में सतेज पाटील के नेतृत्व वाले समविचारी गठबंधन को 13 सीटें मिली थीं, जबकि महायुति के खाते में 12 सीटें आई थीं। अब महाराष्ट्र सरकार के चार सरकारी मनोनीत संचालकों को मतदान का अधिकार देने के फैसले से अध्यक्ष पद के चुनाव का पूरा गणित बदल गया है।

Knews Desk – कोल्हापुर जिला दूध उत्पादक संघ यानी गोकुल के पांच साल के चुनाव में कांग्रेस नेता और विधायक सतेज पाटील के नेतृत्व वाले समविचारी गठबंधन और बीजेपी-शिवसेना-राष्ट्रवादी कांग्रेस की महायुति ने अलग-अलग गठबंधन के रूप में चुनाव लड़ा था। चुनाव में समविचारी गठबंधन को 13 सीटें मिलीं, जबकि महायुति 12 सीटों पर जीत हासिल कर सकी। यानी 25 संचालकों वाले गोकुल में सतेज पाटील के गठबंधन को एक सीट की बढ़त मिली थी।

अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए 14 संचालकों का कोरम जरूरी था, लेकिन पिछली बैठक में कोरम पूरा नहीं हो सका। इसके बाद समविचारी गठबंधन के सभी 13 संचालकों ने अलग से बैठक की और सर्वसम्मति से शशिकांत पाटील-चुयेकर को अध्यक्ष चुन लिया। गठबंधन ने दावा किया कि उसके पास बहुमत है और शशिकांत पाटील-चुयेकर ही गोकुल के अध्यक्ष हैं।

अध्यक्ष पद के अधिकार दिए जाने की मांग को लेकर मुंबई हाईकोर्ट की कोल्हापुर सर्किट बेंच में याचिका दाखिल की गई। याचिका में चुनाव अधिकारी पर गलत कार्यवाही दर्ज करने का आरोप भी लगाया गया। करीब तीन घंटे की सुनवाई के बाद अदालत ने 10 नवंबर को अध्यक्ष पद का चुनाव कराने का आदेश दिया। इसके साथ ही सभी 25 निर्वाचित संचालकों को नोटिस जारी किए गए।

इसी बीच सरकारी मनोनीत संचालकों की संख्या दो से बढ़ाकर चार करने की तैयारी शुरू हुई। मंत्री चंद्रकांत दादा पाटील ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर यह मांग की थी। इसी प्रस्ताव के आधार पर महाराष्ट्र कैबिनेट ने तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक के सालाना कारोबार वाली सहकारी संस्थाओं में दो के बजाय चार सरकारी मनोनीत संचालकों की नियुक्ति और उन्हें मतदान का अधिकार देने का फैसला किया है।

गोकुल की अहमियत सिर्फ उसकी राजनीतिक सत्ता तक सीमित नहीं है। यह महाराष्ट्र का एक बड़ा दूध उत्पादक संघ है और अमूल के बाद देश के सबसे बड़े दूध उत्पादक संघों में इसकी गिनती होती है। गोकुल के जरिए रोजाना करीब साढ़े पांच लाख किसानों से 20 लाख लीटर दूध का संग्रह किया जाता है। किसानों को हर 10 दिन में करीब 100 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है। ऐसे में गोकुल की सत्ता का सीधा संबंध लाखों दूध उत्पादक किसानों और उनके आर्थिक हितों से जुड़ा हुआ है।

गोकुल की कुल 25 निर्वाचित सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। पहले यहां दो सरकारी मनोनीत संचालक थे, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ाकर चार की जाएगी। यानी मतदान का अधिकार रखने वाले संचालकों की संख्या 29 हो जाएगी। इसके अलावा एक सरकारी विशेषज्ञ अधिकारी को भी संचालक के रूप में नियुक्त किया जाएगा। इससे कुल संचालकों की संख्या 30 हो जाएगी।

सरकार के इस फैसले पर शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि चार अतिरिक्त संचालक नियुक्त करके सत्ता चलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस कदम को षड्यंत्र करार दिया।

गोकुल दूध संघ की सत्ता अपने हाथ में लेने के लिए महायुति और सतेज पाटील के समविचारी गठबंधन के बीच जोरदार मुकाबला चल रहा है। महायुति के 12 निर्वाचित संचालक फिलहाल राजस्थान के उदयपुर स्थित मैरियट होटल में ठहरे हुए हैं। अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले इन संचालकों को एकजुट रखने और राजनीतिक रणनीति बनाने की कोशिश की जा रही है।

दूसरी तरफ सतेज पाटील ने सरकार के फैसले के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि वे सभी कानूनी रास्ते अपनाएंगे और चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि साढ़े पांच लाख किसानों ने अपना जनादेश दिया है। अगर जनता के इस फैसले को नकारने की कोशिश की गई तो वे सड़कों पर उतरने के लिए भी तैयार हैं।

इसी बीच गोकुल के मुद्दे पर कोल्हापुर में संघर्ष मोर्चा निकालने की भी तैयारी की जा रही है। यानी गोकुल की सत्ता को लेकर राजनीतिक लड़ाई अब अदालत से निकलकर सड़क तक पहुंचने के संकेत मिल रहे हैं। एक तरफ मुंबई हाईकोर्ट की कोल्हापुर सर्किट बेंच ने अध्यक्ष पद के चुनाव में सभी 25 निर्वाचित संचालकों को मतदान के योग्य माना है। वहीं दूसरी तरफ सरकार ने चार सरकारी मनोनीत संचालकों को भी मतदान का अधिकार देने का फैसला किया है। इससे गोकुल में अध्यक्ष पद के चुनाव का पूरा गणित बदल गया है।

फिलहाल समविचारी गठबंधन के पास 13 संचालकों का समर्थन है, जबकि महायुति के पास 12 संचालक हैं। सरकार के फैसले के बाद चार सरकारी मनोनीत संचालकों को भी मतदान का अधिकार मिलेगा। ऐसे में महायुति का पलड़ा भारी होने की संभावना जताई जा रही है। एक तरफ उदयपुर के होटल में महायुति के 12 संचालक मौजूद हैं, तो दूसरी तरफ सतेज पाटील कानूनी लड़ाई और आंदोलन की तैयारी में जुटे हैं।

अब सबकी नजरें 10 नवंबर को होने वाले गोकुल अध्यक्ष पद के चुनाव पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ गोकुल के अध्यक्ष का नहीं, बल्कि रोजाना 20 लाख लीटर दूध का संग्रह करने वाले और लाखों किसानों के आर्थिक हितों से जुड़े इस बड़े सहकारी संघ की सत्ता का है। अब देखना होगा कि इस सियासी घमासान में आखिर गोकुल की कमान किसके हाथ में जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *