करवा चौथ पर इस बार मौसम सुहागिन महिलाओं की चिंता बढ़ा सकता है। 29 अक्टूबर 2026 को करवा चौथ के दिन अर्नब तूफान के प्रभाव से कई राज्यों में बारिश और आसमान में बादल छाए रहने की आशंका जताई गई है। ऐसे में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत कई इलाकों में रात के समय चांद के दर्शन मुश्किल हो सकते हैं। चांद देखकर व्रत खोलने की परंपरा निभाने वाली महिलाओं के मन में सवाल है कि अगर चंद्रमा दिखाई न दे तो व्रत का पारण कैसे किया जाए। आइए जानते हैं प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का संभावित समय और बादलों के बीच चांद न दिखने पर क्या कर सकते हैं।
KNEWS DESK-करवा चौथ हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। सुबह सरगी से शुरू होने वाला यह व्रत शाम को करवा माता की पूजा और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पूरा किया जाता है। लेकिन इस बार मौसम में संभावित बदलाव के कारण कई जगहों पर चांद के दर्शन में परेशानी हो सकती है।
अर्नब तूफान के प्रभाव से आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कुछ इलाकों में खराब मौसम की स्थिति बताई जा रही है। इसके अलावा देश के कई अन्य हिस्सों में भी बारिश और बादल छाए रहने की संभावना जताई गई है। यदि करवा चौथ की रात आसमान में घने बादल रहे, तो महिलाओं को चंद्रमा के दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, चांद दिखाई देने की स्थिति स्थानीय मौसम और आसमान की स्पष्टता पर निर्भर करेगी।
किन राज्यों में चांद दिखने में हो सकती है परेशानी?
मौसम संबंधी पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल और पश्चिम बंगाल में बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, बिहार, मराठवाड़ा, महाराष्ट्र, रायलसीमा, कर्नाटक, असम, मेघालय, नगालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और मणिपुर के कुछ हिस्सों में भी बारिश का येलो अलर्ट बताए जाने की जानकारी दी गई है। ऐसे मौसम में कई जगहों पर आसमान में बादल छाए रहने से चंद्रमा के दर्शन प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, बारिश या बादल होने का अर्थ यह नहीं है कि हर शहर में चांद दिखाई नहीं देगा। वास्तविक स्थिति स्थानीय मौसम पर निर्भर करेगी।
प्रमुख शहरों में करवा चौथ पर चंद्रोदय का संभावित समय
करवा चौथ पर अलग-अलग शहरों में चंद्रमा निकलने का समय अलग होता है। दिए गए समय के अनुसार, प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का संभावित समय इस प्रकार है।
- दिल्ली: रात 8:17 बजे।
- नोएडा: रात 8:16 बजे के आसपास।
- गुरुग्राम: रात 8:18 बजे के आसपास।
- चंडीगढ़: रात 8:12 बजे।
- लखनऊ: रात 8:06 बजे।
- प्रयागराज: रात 8:06 बजे।
- कानपुर: रात 8:05 बजे।
- पटना: रात 7:52 बजे।
- गया: रात 7:55 बजे।
- जयपुर: रात 8:28 बजे।
- कोलकाता: रात 7:47 बजे।
- भोपाल: रात 8:31 बजे।
- इंदौर: रात 8:39 बजे।
- अहमदाबाद: रात 8:52 बजे।
- मुंबई: रात 9:00 बजे।
- पुणे: रात 8:58 बजे।
- हैदराबाद: रात 8:41 बजे।
- बेंगलुरु: रात 8:55 बजे।
- चेन्नई: रात 8:44 बजे।
- नागपुर: रात 8:29 बजे।
- रायपुर: रात 8:18 बजे।
- रीवा: रात 8:11 बजे।
- जम्मू: रात 8:14 बजे।
- अमृतसर: रात 8:13 से 8:18 बजे के बीच।
- हरिद्वार: रात 8:09 बजे।
- वडोदरा: रात 8:51 बजे।
- राजकोट: रात 9:01 बजे।
- कन्याकुमारी: रात 9:07 बजे।
ध्यान रखें कि ये संभावित समय हैं। मौसम की स्थिति, स्थानीय पंचांग और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चंद्रोदय के समय में अंतर हो सकता है।
बादलों में छिप जाए चांद तो कैसे खोलें करवा चौथ का व्रत?
करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है। ऐसे में यदि निर्धारित चंद्रोदय समय के बाद भी बादलों के कारण चांद दिखाई नहीं देता, तो महिलाओं को घबराने की जरूरत नहीं है। इस स्थिति में स्थानीय धार्मिक परंपराओं और परिवार में प्रचलित रीति-रिवाजों के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यदि चंद्रमा बादलों के कारण दिखाई नहीं दे रहा हो, तो चंद्रोदय के समय के बाद चंद्रमा की दिशा की ओर मुख करके पूजा की जा सकती है। इसके बाद चंद्र देव का स्मरण करते हुए अर्घ्य देने, मंत्र पढ़ने और आरती करने की परंपरा भी बताई जाती है। इसके बाद पति और परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर व्रत का पारण किया जा सकता है। इस संबंध में अपने परिवार की परंपरा या स्थानीय विद्वान की सलाह लेना उचित रहेगा। कुछ लोग दूसरे शहर में मौजूद परिजनों या परिचितों से वीडियो कॉल के माध्यम से चंद्रमा के दर्शन करने का विकल्प भी अपनाते हैं। हालांकि, इसे सभी परंपराओं में मान्य नहीं माना जाता। इसलिए ऐसा करने से पहले अपनी पारिवारिक मान्यता को ध्यान में रखें।
करवा चौथ की पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
करवा चौथ के दिन महिलाएं करवा माता, भगवान गणेश और माता गौरी-शंकर की पूजा करती हैं। शाम को पूजा के दौरान व्रत कथा सुनने और आरती करने की परंपरा है। मौसम खराब होने की आशंका हो, तो पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखें और पूजा निर्धारित समय के आसपास पूरी कर लें।
यदि चंद्रमा दिखाई देने में देरी हो, तो स्थानीय चंद्रोदय समय की जानकारी लेते रहें। केवल बादलों के कारण चंद्रमा नजर न आने पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय परिवार की धार्मिक परंपरा का पालन करें। कुछ मान्यताओं में भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का स्मरण भी किया जाता है, लेकिन व्रत खोलने की विधि अलग-अलग समुदायों और परिवारों में भिन्न हो सकती है।
करवा चौथ का व्रत आस्था, प्रेम और दांपत्य जीवन की मंगलकामना से जुड़ा है। ऐसे में मौसम की अनिश्चितता के बीच पूजा और पारण को लेकर पहले से जानकारी रखना महिलाओं की चिंता कम कर सकता है।