उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव परिणामों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने माना कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को इस बार उम्मीद से ज्यादा सीटें मिलने की अपेक्षा थी, लेकिन पार्टी उतनी सीटें हासिल नहीं कर सकी। उन्होंने कहा कि बीजेपी अपने चुनाव परिणामों की समीक्षा करेगी और उन निर्वाचन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देगी, जहां समाजवादी पार्टी (SP) ने जीत दर्ज की है।
Knews Desk – डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि विधान परिषद का यह चुनाव उच्च शिक्षित और योग्य मतदाताओं के वोट से होता है। बीजेपी ने अपना पिछला प्रदर्शन दोहराया है, लेकिन पार्टी को अधिक सीटें जीतने की उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी सीटों पर भी समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की, जहां बीजेपी को अपनी जीत का भरोसा था। पार्टी इन परिणामों का विश्लेषण करेगी और आगे की चुनावी रणनीति तैयार करेगी।
केशव मौर्य ने कहा कि बीजेपी उन सीटों की भी समीक्षा करेगी, जहां समाजवादी पार्टी ने अपना खाता खोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी चुनाव परिणामों से सबक लेकर आने वाले चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए काम करेगी।
विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन की तुलना की जा रही है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी ने मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद्र शर्मा, मेरठ स्नातक सीट से दिनेश गोयल, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से हरि सिंह ढिल्लों, लखनऊ शिक्षक सीट से उमेश द्विवेदी और आगरा स्नातक सीट से डॉ. मानवेंद्र सिंह के जरिए जीत दर्ज की। गोरखपुर शिक्षक सीट पर बीजेपी के ध्रुव त्रिपाठी को लेकर भी रुझानों की जानकारी सामने आई थी।
वहीं, समाजवादी पार्टी ने वाराणसी शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव और आगरा शिक्षक सीट पर डॉ. आकाश अग्रवाल के जरिए जीत हासिल की। झांसी स्नातक सीट पर मान सिंह यादव की जीत की जानकारी भी सामने आई। वाराणसी स्नातक और लखनऊ स्नातक सीटों पर मतगणना के दौरान सपा उम्मीदवारों को लेकर रुझान बताए गए थे।
इस चुनाव में बीजेपी के प्रदर्शन की तुलना वर्ष 2020 के चुनाव से भी की जा रही है। बताया जा रहा है कि पिछली बार बीजेपी ने छह सीटें जीती थीं, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीतने वाले ध्रुव त्रिपाठी बाद में बीजेपी के साथ आ गए थे। इससे पार्टी की संख्या सात हो गई थी। इस बार बीजेपी को छह सीटें मिलने की स्थिति में लखनऊ स्नातक सीट का नुकसान माना जा रहा है।
दूसरी ओर, वर्ष 2020 में समाजवादी पार्टी ने तीन सीटें जीती थीं और बाद में निर्दलीय एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल के पार्टी में शामिल होने से उसकी संख्या चार हो गई थी। इस बार के चुनाव में सपा पांच सीटों पर जीत दर्ज करती दिख रही है। ऐसे में पार्टी को एक सीट का फायदा होने की बात कही जा रही है।
केशव प्रसाद मौर्य के बयान से साफ है कि बीजेपी चुनाव परिणामों को लेकर संगठनात्मक स्तर पर समीक्षा करने की तैयारी में है। अब यह देखना होगा कि समीक्षा के बाद पार्टी आगामी चुनावों के लिए अपनी रणनीति में क्या बदलाव करती है।