उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड की सियासत का केंद्र एक बार फिर गैरसैंण बन गया है। प्रदेश के चमोली जिले में स्थित भराड़ीसैंण गैरसैण विधानसभा भवन में आज 27 अक्टूबर से शुरू हुए पंचम विधानसभा के वर्ष 2026 के तृतीय सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने हैं। वही प्रदेश में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इस सत्र को राजनीतिक और विकास की दृष्टि से अहम माना जा रहा है। सदन में जहां सरकार अनुपूरक बजट और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में जुटी है, वहीं विपक्ष रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा है। यह तो बात हुई सदन के अंदर की लेकिन इन तमाम राजनीतिक चर्चाओं के बीच एक सवाल आज भी ऐसा है, जो उत्तराखंड राज्य आंदोलन की भावनाओं से जुड़ा है। वह सवाल है प्रदेश की स्थायी राजधानी का, जिसको लेकर राज्य गठन के करीब 26 साल बाद भी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। समय समय पर कई आंदोलन देखने को मिले और सरकार द्वारा गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा जरूर मिला, लेकिन स्थायी राजधानी का मुद्दा आज भी बहस के केंद्र में है। उत्तराखंड आंदोलन के दौरान 42 शहादतों और पहाड़ के विकास की आकांक्षाओं के साथ अलग राज्य का सपना देखा गया था। ऐसे में गैरसैंण में विधानसभा भवन बनने और यहां बार बार सत्र आयोजित होने के बावजूद स्थायी राजधानी का सवाल उठना स्वाभाविक है। विपक्ष का भी आरोप है कि गैरसैंण का मुद्दा राजनीतिक वादों तक सीमित रह गया है, जबकि सरकारों का पक्ष विकास और प्रशासनिक जरूरतों से जुड़ा रहा है। ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या वर्तमान में चल रहा यह सत्र गैरसैंण और स्थायी राजधानी के मुद्दे पर कोई ठोस दिशा देगा, या फिर पहाड़ की यह मांग एक बार फिर राजनीतिक बहस बनकर रह जाएगी। बरहाल जो भी हो लेकिन इन सबके चलते पक्ष विपक्ष के बीच आपसी आरोप प्रत्यारोप जरूर तेज़ हो गया है।
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में आज मंगलवार 27 अक्टूबर 2026 से उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र शुरू हो गया है. सत्र की शुरुआत में सीएम धामी समेत पूरे सदन ने पूर्व सीएम दिवंगत बीसी खंडूड़ी को याद किया. यह सत्र 27 और 28 अक्टूबर 2026 को दो दिन तक चलेगा. इस सत्र में सरकार द्वारा 7 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा. इसके प्रस्ताव को कैबिनेट पहले ही मंजूरी दे चुकी है. सत्र के पहले ही दिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, प्रदेश प्रधान संगठन और स्थानीय पार्टी उत्तराखंड क्रांति दल ने सरकार के खिलाफ विधानसभा घेराव का ऐलान किया है. विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं.वही लम्बे समय से गैरसैंण और स्थायी राजधानी बनाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है जिस पर आज सत्र के पहले दिन ही सदन के बाहर विपक्षी दलों ने जम कर हंगामा सरकार के खिलाफ कटा।साथ ही खानपुर से चुने निर्दलीय विधायक ने तो सदन में उनकी बात तक न सुनाने को लेकर सदन में कल इस्तीफे देने की पेशकश तक कर दी।
फिलहाल गैरसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र के बीच स्थायी राजधानी का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ सरकार के सामने प्रदेश की विकास योजनाओं को गति देने और वित्तीय जरूरतों को पूरा करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ विपक्ष के लिए जनता से जुड़े सवालों पर सरकार को घेरने का मौका है। लेकिन इन सबके बीच गैरसैंण और स्थायी राजधानी का सवाल आज भी अपनी जगह कायम है। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान जिस पहाड़ के विकास और क्षेत्रीय संतुलन की परिकल्पना की गई थी, उसे लेकर लोगों की उम्मीदें अब भी बरकरार हैं। गैरसैंण में विधानसभा भवन का निर्माण और यहां सत्रों का आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम जरूर हैं, लेकिन स्थायी राजधानी पर अंतिम निर्णय का इंतजार जारी है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह देखना अहम होगा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या गैरसैंण को लेकर जनता की अपेक्षाओं पर कोई ठोस पहल हो पाती है या फिर स्थायी राजधानी को लेकर समय समय पर होती सियासी बहस इसी प्रकार जारी रहेगी।