Knews Desk– उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े मामले में अभिनेत्री उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। रानीपुर पुलिस ने उन्हें देर रात रोशनाबाद स्थित कोर्ट में पेश किया, जहां से अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं और नार्को टेस्ट से ठीक पहले हुई गिरफ्तारी को लेकर जवाब मांगा है।कांग्रेस नेता कुमारी शैलजा ने सोमवार को इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि उर्मिला सनावर के खिलाफ कार्रवाई नार्को टेस्ट से ठीक पहले क्यों की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उर्मिला नार्को टेस्ट के लिए तैयार थीं और उनका टेस्ट होने वाला था, लेकिन उससे पहले ही उनके खिलाफ नया मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।कुमारी शैलजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में बीजेपी सरकार आखिर किसे बचाने के लिए इतनी बेचैन है। उन्होंने उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी को सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करने वाला कदम बताया। शैलजा ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई मामले में कथित वीआईपी की भूमिका का सच सामने आने से रोकने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, यह कांग्रेस नेता के आरोप हैं और इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों को देखना जरूरी है।
उर्मिला सनावर ने भी नार्को टेस्ट को लेकर अपना पक्ष रखा था। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने बताया था कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 18 अक्टूबर को उनसे करीब चार घंटे तक पूछताछ की थी। उनके मुताबिक, पूछताछ के दौरान उनसे नार्को टेस्ट के लिए सहमति के बारे में पूछा गया और उन्होंने इसके लिए तैयार होने की बात कही।उर्मिला ने बताया कि इसके अगले दिन सीबीआई के एक अधिकारी का फोन आया था। इसके बाद उनके घर पहुंचकर नार्को-एनालिसिस टेस्ट से संबंधित नोटिस दिया गया और 23 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे देहरादून में निर्धारित प्राधिकरण के सामने पेश होने को कहा गया। उनके अनुसार, यह नोटिस अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े वायरल ऑडियो क्लिप के मामले में था। अदालत से न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद उन्होंने कहा, “क्रांतिकारी ऐसे ही जेल जाते हैं।”
अंकिता भंडारी ऋषिकेश के वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने पूरे उत्तराखंड में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। अब इससे जुड़े नए घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि संवेदनशील मामले का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि किसी बेटी के दुख का राजनीतिक लाभ उठाना या बिना सबूत आरोप लगाना कितना उचित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों में तथ्यों, साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।फिलहाल, उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं। मामले में आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाले तथ्यों पर सबकी नजर बनी हुई है।