नेहा बोरा को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका, पीस बॉन्ड के खिलाफ याचिका खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट ने छात्र संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी है। नेहा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का बॉन्ड भरने के संबंध में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने को कहा गया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए मजिस्ट्रेट के लिए कुछ निर्देश भी जारी किए हैं।

Knews Desk – छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है। शुक्रवार को हाई कोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी नोटिस को चुनौती दी थी। इस नोटिस में उन्हें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी बॉन्ड भरने के संबंध में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष पेश होने को कहा गया था।

इससे पहले गुरुवार को जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने नेहा बोरा के वकील और दिल्ली पुलिस की दलीलें करीब तीन घंटे तक सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली पुलिस ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। शुक्रवार को अदालत ने याचिका खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने मजिस्ट्रेट के लिए कुछ निर्देश भी जारी किए।

क्या है पूरा मामला?

नेहा बोरा को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत 17 अक्टूबर को नोटिस जारी किया गया था। इसमें उन्हें 19 अक्टूबर को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होकर यह बताने के लिए कहा गया था कि जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए उनसे 10 हजार रुपये का निजी बॉन्ड और एक जमानतदार क्यों न लिया जाए।

इसके बाद नेहा बोरा ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने नोटिस को रद्द करने और पुलिस को उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश देने की मांग की थी।

BNSS की धारा 126 में क्या है प्रावधान?

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, BNSS की धारा 126 के तहत विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट को शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरवाने की कार्यवाही करने का अधिकार है। हालांकि, इसके लिए ऐसी विश्वसनीय जानकारी होना जरूरी है, जिससे यह आशंका हो कि संबंधित व्यक्ति शांति भंग कर सकता है, सार्वजनिक व्यवस्था में खलल डाल सकता है या ऐसा कोई गलत काम कर सकता है जिससे अशांति पैदा होने की संभावना हो।

इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी है और मजिस्ट्रेट के लिए कुछ निर्देश जारी किए हैं।

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