Knews Desk- दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। पिछले तीन दिनों से छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं और विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्र कुलपति के खिलाफ भी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। इसी बीच विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर कई नारे लिखे मिलने का मामला सामने आया है। इनमें ‘RSS Go Back’, ‘Free Kashmir’, ‘Free Sharjeel Imam’ और ‘VC Go Back’ जैसे नारे शामिल हैं। हालांकि, इन नारों को लिखने वालों की पहचान अभी सामने नहीं आई है।
छात्रों की प्रमुख मांग विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने की है। प्रदर्शन के बीच छात्रों की समस्याओं के समाधान और उनकी मांगों पर बातचीत के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने 18 अक्टूबर को सात सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसके बाद प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन अब तक भूख हड़ताल समाप्त होने का रास्ता नहीं निकल पाया है।समिति ने 19 अक्टूबर को छात्रों के साथ बातचीत शुरू की थी। इस दौरान छात्र प्रतिनिधियों को सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन के कार्यालय में बुलाया गया। इसके बाद 20 अक्टूबर को करीब दो घंटे तक बैठक हुई, जिसमें बातचीत के दौरान सामने आए बिंदुओं को लिखित रूप दिया गया। हालांकि, छात्र प्रतिनिधियों ने उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए। इससे बातचीत के जरिए समाधान निकालने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में चुनौती बनी हुई है।
21 अक्टूबर को कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। इसमें छात्रसंघ के गठन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। बैठक में जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति बनाने का फैसला लिया गया। इस प्रक्रिया के लिए जामिया अधिनियम, 1988 की धारा 23(J) और 23(K) को आधार बनाया गया है। प्रशासन की ओर से उठाए गए इन कदमों के बावजूद छात्र अपनी मांग को लेकर भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं।वहीं, लगातार भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की चिकित्सकीय निगरानी के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. इरशाद हुसैन नकवी के नेतृत्व में मेडिकल टीम तैनात की है। इसका उद्देश्य भूख हड़ताल कर रहे छात्रों की सेहत पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर लिखे नारों को लेकर अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई है कि इनके पीछे कौन है। प्रशासन की ओर से भी इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। फिलहाल, जामिया में छात्रसंघ चुनाव की मांग, प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत तथा भूख हड़ताल को लेकर स्थिति बनी हुई है। अब देखना होगा कि आगे की वार्ता से छात्रों की मांगों पर कोई सहमति बनती है या नहीं।