UP चुनाव से पहले अखिलेश यादव की पटेलों पर नजर, कुर्मी वोट बैंक के लिए बनाई पांच रणनीतियां

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने गैर-यादव पिछड़ी जातियों को जोड़ने की कोशिश तेज कर दी है। पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav 31 अक्टूबर को Varanasi के अकेलवां में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर जनसभा करेंगे। सपा की रणनीति कुर्मी समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और किसानों, युवाओं, आरक्षण व राजनीतिक हिस्सेदारी जैसे मुद्दों को उठाने की है।

Knews Desk – उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी की नजर पटेल यानी कुर्मी समाज के मतदाताओं पर है। पार्टी 31 अक्टूबर को Varanasi के अकेलवां में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर जनसभा आयोजित करने जा रही है। इस कार्यक्रम को पूर्वांचल में गैर-यादव पिछड़े वर्गों के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

जनसभा स्थल रोहनिया और सेवापुरी विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों क्षेत्रों में पटेल समाज की आबादी करीब एक लाख बताई जाती है। सपा की कोशिश है कि यादव मतदाताओं के साथ कुर्मी समाज का समर्थन भी मजबूत किया जाए। पार्टी को उम्मीद है कि इससे आगामी विधानसभा चुनाव में उसे फायदा मिल सकता है।

सपा की पहली रणनीति पार्टी में पटेल नेताओं की राजनीतिक भागीदारी को सामने रखना है। पूर्व मंत्री Surendra Patel जनसभा की तैयारियों में जुटे हैं। वह अपने समाज के बीच यह संदेश दे रहे हैं कि पार्टी में पटेल सांसदों की संख्या यादव सांसदों से अधिक है। सपा का प्रयास है कि इस आधार पर पार्टी को केवल यादवों की पार्टी मानने वाली धारणा को चुनौती दी जाए और पटेल समाज को अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी का भरोसा दिलाया जाए।

दूसरी रणनीति के तहत समाजवादी पार्टी बीजेपी सरकार पर पटेल समाज को पर्याप्त सम्मान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं देने का आरोप लगा रही है। सपा नेताओं का कहना है कि समाज की आबादी और उसके राजनीतिक प्रभाव के अनुपात में सत्ता तथा संगठन में भागीदारी नहीं मिल रही है। हालांकि, ये आरोप सपा नेताओं के राजनीतिक दावे हैं। बीजेपी का पक्ष इस खबर में शामिल नहीं है।

तीसरी रणनीति किसानों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। सपा नेता खेती की लागत, उपज के उचित दाम और बाजार तक पहुंच जैसे सवाल उठा रहे हैं। Surendra Patel का आरोप है कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा पूरा नहीं हुआ और सब्जी व फूल की खेती करने वाले किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम दिलाने के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित नहीं की गईं। पार्टी इन मुद्दों के जरिए खेती पर निर्भर पटेल परिवारों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।

चौथी रणनीति रोजगार और आरक्षण के मुद्दे पर युवाओं को जोड़ने की है। सपा नेता सरकारी नौकरियों और आरक्षण से जुड़े विवादों को उठा रहे हैं। खास तौर पर 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण को लेकर हुए विवाद का उल्लेख करते हुए पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि इससे पटेल समाज के युवाओं को नुकसान हुआ। सपा इन सवालों को युवाओं के बीच उठाकर सरकार के प्रति असंतोष को राजनीतिक समर्थन में बदलना चाहती है।

पांचवीं रणनीति चुनाव से पहले मतदाताओं के खातों में संभावित धनराशि भेजे जाने के मुद्दे पर है। रिपोर्ट के अनुसार, सपा के कुछ नेता अपने समाज के लोगों से कह रहे हैं कि यदि चुनाव से पहले सरकार उनके खातों में पैसे भेजती है, तो वे उसे स्वीकार कर सकते हैं, लेकिन मतदान अपने विवेक से करें। यह सपा नेताओं का राजनीतिक संदेश है, न कि सरकार की ओर से धनराशि भेजे जाने की पुष्टि।

वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में गैर-यादव पिछड़ी जातियों का समर्थन चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पटेल, मौर्य, कुशवाहा और अन्य पिछड़े समुदायों तक पहुंच बनाने की कोशिश सपा की पीडीए रणनीति से भी जुड़ी है। पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में मिले समर्थन को विधानसभा चुनाव में दोहराने की उम्मीद कर रही है।

पूर्वांचल के अलावा अवध और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भी कुर्मी मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। ऐसे में Varanasi की जनसभा के जरिए Akhilesh Yadav का संदेश कितना प्रभावी रहता है और पटेल समाज के मतदाताओं का समर्थन किस ओर जाता है, यह आगामी विधानसभा चुनाव में देखने वाली बात होगी।

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