अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत में CJP प्रदर्शनों और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है। छह अमेरिकी सांसदों ने उनसे इस मुद्दे को भारत सरकार के सामने उठाने की अपील की थी।
Knews Desk– भारत में CJP प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकारों को लेकर उठे सवालों पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है और अमेरिका इसमें दखल नहीं देगा। इस मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र के कुछ विशेष रैपोर्टेयर्स ने भी चिंता जताई थी।
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने प्रदर्शनों के दौरान कथित बल प्रयोग, हिरासत और प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाए थे। वहीं, छह अमेरिकी सांसदों ने रूबियो से भारत सरकार के साथ बातचीत में मानवाधिकारों का मुद्दा उठाने की अपील की थी। इन सांसदों में प्रमिला जयपाल, इल्हान उमर, जिम मैकगवर्न, रशीदा तलीब, एलेनोर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया शामिल हैं।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारत ने कहा कि ऐसे मामलों पर चर्चा तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए।
मार्को रूबियो 20 अक्टूबर को तीन दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा सहयोग और सुरक्षा सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर रूबियो ने कहा कि करीब 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी टैरिफ और वीजा नीतियां भारत को निशाना बनाकर नहीं बनाई गई हैं।