Knews Desk- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विजयादशमी की पूर्व संध्या पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सत्य, न्याय, मर्यादा और सामाजिक एकता का संदेश दिया। अपने ब्लॉग में उन्होंने कहा कि विजयादशमी हमें विश्वास दिलाती है कि अन्याय कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ खड़े होने का संकल्प उससे बड़ा होता है। असत्य का वैभव क्षणिक है, जबकि सत्य का सामर्थ्य शाश्वत है।
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम की विजय का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पर्व हमें सिखाता है कि सत्य के प्रति आस्था के साथ उसकी रक्षा करने का साहस भी जरूरी है। न्याय की कामना तभी पूरी होती है, जब समाज उसके लिए खड़े होने का संकल्प लेता है।
मोहन यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम के जीवन में शक्ति की आराधना का उद्देश्य लोकमंगल रहा है। उनका धनुष पीड़ितों के लिए आश्वासन और अत्याचारियों के लिए चेतावनी का प्रतीक है। श्रीराम का पराक्रम मर्यादा से प्रेरित था और उनके संकल्प जनकल्याण के लिए समर्पित थे।
उन्होंने कहा कि वनवास के कठिन मार्ग पर समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर श्रीराम ने यह संदेश दिया कि विश्वास, संगठन और सामूहिक प्रयास से बड़ी से बड़ी चुनौती पर विजय प्राप्त की जा सकती है। यही भारतीय सांस्कृतिक चेतना का आधार और राष्ट्रनिर्माण का मार्ग है।
मुख्यमंत्री ने विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन को शक्ति के विवेकपूर्ण इस्तेमाल और उससे जुड़े उत्तरदायित्व की अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि शक्ति का उद्देश्य निर्बलों की रक्षा करना, अन्याय के खिलाफ खड़ा होना और मानवता के कल्याण के लिए काम करना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शस्त्र धारण करने वाले हाथों में संयम और निर्णय लेने वाले मन में संवेदना होनी चाहिए। मर्यादा से अनुशासित शक्ति ही समाज का विश्वास बनती है।
मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सुरक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प और भारतीय सशस्त्र बलों का पराक्रम देशवासियों को गर्व से भरता है। भारत शांति, सहयोग और सह-अस्तित्व में विश्वास रखता है, लेकिन अपनी संप्रभुता, स्वाभिमान और नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक निर्णय लेने को भी प्रतिबद्ध है।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकवादी ढांचों के खिलाफ सटीक कार्रवाई कर साहस, कौशल और सैन्य दक्षता का परिचय दिया। मुख्यमंत्री ने देश की रक्षा में जुटे जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि विजयादशमी पर उनके कर्तव्य और समर्पण से प्रेरणा लेनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमा पर तैनात सैनिक का जीवन त्याग और तपस्या का प्रतीक है। जब लोग अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाते हैं, तब सैनिक अपने परिवार से दूर रहकर देश की सुरक्षा में जुटे रहते हैं।
उन्होंने कहा कि सैनिकों के साथ उनके परिवारों का धैर्य और समर्पण भी सम्मान के योग्य है। सैनिकों, वीर नारियों और सैन्य परिवारों का सम्मान राष्ट्रीय चेतना का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। उनके त्याग का स्मरण नागरिकों को अपने दायित्वों के प्रति सजग बनाता है।
मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में सुशासन के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि शासन का केंद्र नागरिकों का सम्मान, सुरक्षा और कल्याण है। माताओं-बहनों को सुरक्षित वातावरण, युवाओं को प्रतिभा निखारने के अवसर और किसानों को अपने परिश्रम का लाभ मिलना चाहिए। जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना भी सरकार का संकल्प है।
उन्होंने कहा कि शासन की वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया। नागरिकों को समय पर न्याय, सहज सेवाएं और आगे बढ़ने के अवसर मिलना रामराज्य की भावना को लोकजीवन में साकार करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने और बुराइयों से मुक्ति का संकल्प लेने का अवसर भी है। अहंकार, लोभ, भेदभाव और कर्तव्य के प्रति उदासीनता को दूर करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने ईमानदारी को व्यवहार, सद्भाव को संबंधों और अनुशासन को दिनचर्या में अपनाने का आह्वान किया। उनके मुताबिक, समाज की एकता सबसे बड़ी शक्ति है और प्रत्येक नागरिक का सम्मान तथा राष्ट्रहित के प्रति साझा समर्पण भारत को मजबूत बनाता है।
मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से इस विजयादशमी पर अपने संकल्पों को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की मर्यादा, मां दुर्गा की शक्ति और वीर सैनिकों का साहस सभी के लिए प्रेरणा बने।
मुख्यमंत्री ने सत्य के पक्ष में खड़े होने, न्याय के लिए कार्य करने और अपने कर्तव्यों के माध्यम से राष्ट्र को सशक्त बनाने का संदेश दिया। उन्होंने शक्ति से सुरक्षा, सामर्थ्य से समृद्धि और सत्य से विजय के संकल्प के साथ देश का गौरवशाली भविष्य गढ़ने का आह्वान किया।