KNEWS DESK- महाअष्टमी पर मां महागौरी की आराधना का विशेष महत्व है। इस दिन भक्त विधि-विधान से पूजा करते हैं, नारियल और हलवा-पूरी का भोग लगाते हैं और कन्या पूजन के जरिए माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जानिए पूजा की विधि, शुभ मंत्र, भोग और कन्या पूजन से जुड़ी परंपराएं।
शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन यानी 18 अक्टूबर को महाअष्टमी मनाई जा रही है। यह दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। महाअष्टमी पर मां महागौरी को नारियल, हलवा, पूरी, काले चने और खीर का भोग लगाने की परंपरा है। इसके साथ ही कन्या पूजन भी किया जाता है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है।
मां महागौरी का स्वरूप और महत्व
मां महागौरी को पवित्रता, शांति, सौम्यता और करुणा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनका वर्ण शंख, चंद्रमा और कुंद के फूल के समान उज्ज्वल है। माता सफेद वस्त्र और आभूषण धारण करती हैं, इसलिए उन्हें श्वेतांबरधरा भी कहा जाता है। उनका वाहन वृषभ यानी बैल है और उनकी चार भुजाएं हैं। माता के दाएं हाथ में अभय मुद्रा और त्रिशूल, जबकि बाएं हाथ में डमरू और वरद मुद्रा सुशोभित हैं। मान्यता है कि महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं।
महाअष्टमी तिथि और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। ऐसे में 18 अक्टूबर को महाअष्टमी की पूजा और कन्या पूजन किया जा सकता है। महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा के साथ महानिशा पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं और मां दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
मां महागौरी की पूजा विधि
महाअष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके गंगाजल छिड़कें। एक चौकी पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल या अक्षत लेकर संकल्प करें और माता का ध्यान करें। इसके बाद मां को रोली, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें। माता को सफेद फूल चढ़ाएं। चमेली या रातरानी के फूल भी अर्पित किए जा सकते हैं। फिर धूप-दीप जलाकर पूजा करें और माता को सफेद वस्त्र या श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
पूजा के दौरान मां महागौरी के मंत्र का जाप करें। अंत में कपूर या घी के दीपक से आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
मां महागौरी का मंत्र
महाअष्टमी पर मां महागौरी की आराधना करते समय इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
मां महागौरी को क्या भोग लगाएं?
महाअष्टमी पर मां महागौरी को नारियल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा हलवा, पूरी, काले चने और खीर का भोग भी लगाया जाता है। दूध से बनी मिठाइयां भी प्रसाद में शामिल की जा सकती हैं। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं में बांटें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के आठवें दिन गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना भी शुभ माना जाता है।
महाअष्टमी पर कन्या पूजन की विधि
महाअष्टमी पर कन्या पूजन की विशेष परंपरा है। इस दिन नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर आमंत्रित किया जाता है। परंपरा के अनुसार, उनके साथ एक बालक को बटुक भैरव या लांगुर के रूप में पूजने की मान्यता भी है।
कन्याओं को सम्मानपूर्वक आसन पर बैठाएं और उनके चरण धोकर तिलक लगाएं। इसके बाद उन्हें हलवा, पूरी और काले चने का भोजन कराएं। भोजन के बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार उपहार या दक्षिणा दें और उनका आशीर्वाद लें।
मान्यता है कि श्रद्धा और सम्मान के साथ किया गया कन्या पूजन भक्तों के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना का प्रतीक है। महाअष्टमी के इस पावन अवसर पर मां महागौरी की पूजा-अर्चना कर भक्त माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।