हैदराबाद T20 में अर्शदीप सिंह ने 4 ओवर में 52 रन दिए और 6 वाइड गेंदें फेंकी। वेस्टइंडीज के खिलाफ इस प्रदर्शन के बाद उनकी गेंदबाजी में अनुशासन, निरंतरता और विविधता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी संभालना अर्शदीप के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
Knews – भारत और वेस्टइंडीज के बीच हैदराबाद में खेले गए T20 मुकाबले में टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ वेस्टइंडीज ने T20 सीरीज में 2-2 की बराबरी कर ली। वेस्टइंडीज के कप्तान शे होप ने शानदार शतक लगाया। हालांकि, सीरीज का निर्णायक मुकाबला 17 अक्टूबर को खेला जाना है। भारतीय टीम के सामने सीरीज जीतने का मौका अभी बाकी है, लेकिन इस बीच तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह की गेंदबाजी चिंता का विषय बन गई है।
हैदराबाद में दोनों टीमों ने मिलकर 470 रन बनाए। मुकाबले में 240 में से 60 गेंदों पर बाउंड्री लगी और कुल 298 रन बाउंड्री से बने। ऐसे हाई स्कोरिंग मुकाबले में 4 ओवर में 52 रन देना अपने आप में पूरी कहानी नहीं बताता, लेकिन अर्शदीप की 6 वाइड गेंदों ने उनके गेंदबाजी अनुशासन पर सवाल खड़े किए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वह T20 क्रिकेट में सातवीं बार एक मैच में 50 से ज्यादा रन देने वाले गेंदबाज बने। उनके करियर में एक्स्ट्रा गेंदों की संख्या भी 150 तक पहुंच गई है।
अर्शदीप की गेंदबाजी में सबसे बड़ी चुनौती उनकी स्विंग और विविधता को लेकर बताई जा रही है। स्विंग गेंदबाजी के दम पर भारतीय टीम में जगह बनाने वाले अर्शदीप अब पहले जैसी स्विंग का प्रभाव नहीं दिखा पा रहे हैं। उनकी गेंदबाजी में वेरिएशन की कमी भी दिखाई देती है। एक गेंदबाज के लिए लगातार अपनी रणनीति में बदलाव करना और बल्लेबाजों को चौंकाना जरूरी होता है। महान स्पिनर अनिल कुंबले ने भी अपने करियर में समय के साथ नई गेंदों और तकनीकों को अपनाया था। ऐसे में अर्शदीप को भी अपनी गेंदबाजी में नए विकल्प तलाशने की जरूरत है।
हैदराबाद मुकाबले में भारतीय गेंदबाजों की लाइन और लेंथ पर भी सवाल उठे। उपलब्ध विश्लेषण के मुताबिक, 60 प्रतिशत से ज्यादा गेंदें बल्लेबाजों के हिटिंग एरिया में थीं। वेस्टइंडीज के गेंदबाजों की तुलना में भारतीय गेंदबाजों ने स्लोअर डिलीवरी का इस्तेमाल भी कम किया। अर्शदीप से उम्मीद थी कि वह अपनी गेंदबाजी में विविधता लाने के साथ युवा गेंदबाजों मयंक और प्रिंस यादव को भी मार्गदर्शन देंगे। लेकिन उनकी वाइड गेंदों ने भारतीय टीम की मुश्किलें बढ़ाईं। एक ओवर में तीन वाइड गेंदें किसी भी स्तर के मुकाबले में टीम की रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं।
जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में अर्शदीप की भूमिका और अहम हो जाती है। भारतीय टीम में बुमराह को तेज गेंदबाजी आक्रमण का प्रमुख माना जाता है, लेकिन वह चयन नीति के तहत चुनिंदा मुकाबलों में ही खेलते हैं। ऐसे में T20 फॉर्मेट में अर्शदीप से तेज गेंदबाजी यूनिट का नेतृत्व करने और दबाव के समय जिम्मेदारी उठाने की उम्मीद की जाती है।
महेंद्र सिंह धोनी के कप्तानी दौर में जहीर खान को गेंदबाजी से जुड़ी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी। उनका काम केवल विकेट लेना नहीं, बल्कि गेंदबाजी यूनिट को दिशा देना भी था। इसी तरह अर्शदीप को भी अपनी भूमिका को सिर्फ गेंदबाजी तक सीमित नहीं रखना होगा। उन्हें परिस्थितियों के अनुसार लाइन-लेंथ बदलने, वाइड गेंदों पर नियंत्रण रखने और दूसरे गेंदबाजों को सही सलाह देने पर ध्यान देना होगा।
अर्शदीप के लिए यह चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी जगह को लेकर प्रदर्शन अहम भूमिका निभाता है। उनका टेस्ट करियर अभी शुरू नहीं हुआ है और वनडे टीम में भी उन्हें सीमित अवसर मिलते हैं। ऐसे में T20 क्रिकेट में निरंतर अच्छा प्रदर्शन करना उनके लिए जरूरी है। दो बार विश्व चैंपियन टीम का हिस्सा रहना भी भविष्य में टीम में जगह की गारंटी नहीं देता। अब देखना होगा कि अर्शदीप सिंह अगले मुकाबले में अपनी गलतियों से सीखकर वापसी कर पाते हैं या नहीं।