IIT बॉम्बे सर्वे: 4 में से 1 इंजीनियरिंग छात्र बदलना चाहता है ब्रांच, प्लेसमेंट के लिए CSE पहली पसंद

Knews Desk- IIT बॉम्बे ने वर्ष 2026 में ग्रेजुएशन पूरा करने वाले छात्रों के बीच ‘Insight Senior Survey 2026’ आयोजित किया। इस सर्वे का उद्देश्य छात्रों की प्राथमिकताओं, कैंपस जीवन के अनुभवों और भविष्य को लेकर उनकी सोच को समझना था। सर्वे में सामने आया कि इंजीनियरिंग की ब्रांच चुनने के बाद भी कई छात्र अपनी पसंद और करियर की संभावनाओं को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। बेहतर प्लेसमेंट की उम्मीद में कुछ छात्र अपनी मौजूदा ब्रांच बदलकर कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में जाना चाहते हैं।सर्वे के मुताबिक, 25 फीसदी छात्रों ने ब्रांच बदलने की इच्छा जताई। इन छात्रों की पसंद CSE रही। इससे पता चलता है कि छात्रों के बीच कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग को लेकर आकर्षण बना हुआ है। बेहतर नौकरी और प्लेसमेंट की संभावनाएं भी छात्रों की ब्रांच संबंधी प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, सर्वे में शामिल छात्रों की सीमित संख्या को देखते हुए इन आंकड़ों को पूरे IIT बॉम्बे या सभी इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्रों की राय नहीं माना जा सकता।

सर्वे में छात्रों से परीक्षाओं और असाइनमेंट में नकल से जुड़े सवाल भी पूछे गए। इसके जवाब में 24 फीसदी छात्रों ने स्वीकार किया कि उन्होंने दबाव या मजबूरी में एक-दो बार नकल की थी। वहीं, अधिकांश छात्रों ने नकल करने की बात से इनकार किया। यह आंकड़ा शैक्षणिक दबाव और छात्रों के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर चर्चा का विषय है।करियर को लेकर भी छात्रों के बीच अनिश्चितता देखने को मिली। सर्वे में शामिल 28 फीसदी छात्रों ने कहा कि वे अपने मौजूदा सेक्टर से बाहर निकलने के बारे में सोच रहे हैं। वहीं, 32 फीसदी छात्रों ने माना कि उन्हें इस बात को लेकर निश्चितता नहीं है कि वे अगले पांच साल बाद भी इसी सेक्टर में काम करेंगे या नहीं। ये आंकड़े बताते हैं कि प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ाई पूरी करने के बावजूद कुछ छात्र अपने भविष्य और करियर की दिशा को लेकर असमंजस में हैं।सर्वे में मानसिक स्वास्थ्य और काउंसलिंग से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया। इसमें 24 छात्रों ने बताया कि उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में संस्थान की काउंसलिंग सेवाओं का इस्तेमाल किया। वहीं, 41 छात्रों ने कहा कि उन्हें कभी काउंसलिंग या थेरेपी की जरूरत महसूस नहीं हुई। इसके अलावा, 33 छात्रों ने अपनी समस्याओं से निपटने के लिए दोस्तों और परिवार की मदद लेने की बात कही। इससे छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता और सामाजिक सहयोग के महत्व का पता चलता है।

कितने छात्रों ने लिया सर्वे में हिस्सा?

IIT बॉम्बे ने यह सर्वे वर्ष 2026 में ग्रेजुएट होने वाले लगभग 2,400 छात्रों के लिए आयोजित किया था। हालांकि, इसमें केवल 144 छात्रों ने हिस्सा लिया। यानी कुल लक्षित समूह के लगभग 6 फीसदी छात्रों ने ही अपनी राय साझा की। ऐसे में सर्वे के नतीजों को समझते समय इस सीमित भागीदारी को ध्यान में रखना जरूरी है।कुल मिलाकर, IIT बॉम्बे के इस सर्वे में ब्रांच चयन, प्लेसमेंट, करियर को लेकर अनिश्चितता और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे सामने आए हैं। ये नतीजे बताते हैं कि छात्रों के लिए केवल डिग्री हासिल करना ही नहीं, बल्कि सही करियर विकल्प चुनना और पढ़ाई के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *