बिहार में PhD के नियम बदले, थीसिस अपलोड किए बिना नहीं मिलेगी डिग्री; जानें नई समयसीमा

Knews Desk– बिहार में पीएचडी की डिग्री देने की प्रक्रिया को लेकर राज्यपाल एवं कुलाधिपति सचिवालय ने विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। लोकभवन की ओर से राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को शोधगंगा पोर्टल पर थीसिस अपलोड करने की व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके अलावा सचिवालय प्रशासन ने विश्वविद्यालयों से पोर्टल पर अपलोड की गई थीसिस की रिपोर्ट भी मांगी है। इसका उद्देश्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना और लंबित शोध प्रबंधों को पोर्टल पर उपलब्ध कराना है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बिहार के विश्वविद्यालय अब तक 20,152 पीएचडी धारकों की थीसिस शोधगंगा पोर्टल पर अपलोड कर चुके हैं। वहीं, करीब 50 हजार पीएचडी धारकों की थीसिस अपलोड होना अभी बाकी है। ऐसे में विश्वविद्यालयों को लंबित थीसिस अपलोड करने की प्रक्रिया में तेजी लानी होगी। निर्धारित समयसीमा का पालन करना भी जरूरी होगा, ताकि शोधार्थियों की डिग्री से जुड़ी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC ने शोध कार्यों में नकल और साहित्यिक चोरी को रोकने के उद्देश्य से थीसिस को शोधगंगा पोर्टल पर अपलोड करने की व्यवस्था बनाई है। इसके तहत शोध प्रबंध की जांच करने के बाद उसे पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाता है। बिहार के कुछ विश्वविद्यालयों में इस नियम का पूरी तरह पालन नहीं होने पर कुलाधिपति सचिवालय ने नाराजगी जताई है। अब सभी विश्वविद्यालयों से निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने की अपेक्षा की गई है।

शोधगंगा पोर्टल को इन्फॉर्मेशन एंड लाइब्रेरी नेटवर्क यानी INFLIBNET के तहत विकसित किया गया है। इस पोर्टल पर देशभर के शोध प्रबंध उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे विद्यार्थी, शिक्षक और दूसरे शोधार्थी विभिन्न विषयों पर किए गए शोध को पढ़ सकते हैं। इससे शोध सामग्री तक पहुंच आसान होती है और पहले से उपलब्ध शोध की जानकारी मिलने के कारण साहित्यिक चोरी की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है।पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय ने मई में ही इस नियम को लेकर शोधार्थियों के लिए निर्देश जारी किए थे। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया था कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर पीएचडी अवार्ड की अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी और शोधार्थी को डिग्री नहीं मिलेगी। अब राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों को भी इस व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करना होगा।

थीसिस अपलोड करने के लिए शोधार्थियों को निर्धारित प्रारूप में जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें टाइटल पेज, घोषणा पत्र, प्रमाणपत्र, आभार, विषय सूची, सारांश, पांच अध्याय, संदर्भ सूची और प्रश्नावली जैसे दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा निष्कर्ष, भविष्य में किए जाने वाले शोध की जानकारी और प्लेगरिज्म रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।इस नियम के लागू होने से बिहार के पीएचडी शोधार्थियों को अपनी थीसिस और उससे जुड़े दस्तावेज समय पर तैयार रखने होंगे। मौखिक परीक्षा पूरी होने के बाद एक सप्ताह के भीतर थीसिस अपलोड करने की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा। विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी होगी कि वे निर्धारित नियमों का पालन कराएं और शोध प्रबंधों को शोधगंगा पोर्टल पर उपलब्ध कराएं।

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