SIR के खिलाफ CJP के आंदोलन को बांग्लादेशी NCP का समर्थन, नाहिद इस्लाम ने कही ये बात

knews desk – बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन का समर्थन किया है। शेख हसीना सरकार को सत्ता से हटाने वाले छात्र आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाली NCP ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और जंतर-मंतर पर लगाई गई पाबंदियों पर चिंता जताई है। पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम ने कहा कि भारत के युवा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक, यह लड़ाई केवल भारत के युवाओं की नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में लोकतांत्रिक मूल्यों की लड़ाई है।

नाहिद इस्लाम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर भारत के युवाओं और लोकतांत्रिक ताकतों के प्रति एकजुटता जताई है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब CJP ने रविवार, 11 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर जुटने का आह्वान किया है। इससे एक दिन पहले दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की थी। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया।

नाहिद इस्लाम ने भारत के युवाओं के नाम जारी किया संदेश

NCP संयोजक नाहिद इस्लाम ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उनकी पार्टी भारत के उन युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है, जो चुनावी जवाबदेही की मांग कर रहे हैं और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने नई दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, आयोजकों और पत्रकारों की हालिया हिरासत के साथ-साथ जंतर-मंतर पर इंटरनेट बंद करने और पाबंदियां लगाने जैसी कार्रवाइयों पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि ये कदम बुनियादी स्वतंत्रता के लिए खतरा हैं। चुनावी निष्पक्षता और संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़ी चिंताओं का जवाब पारदर्शिता के साथ दिया जाना चाहिए, न कि बैरिकेड्स और सेंसरशिप के जरिए। नाहिद इस्लाम ने कहा कि ढाका से उनकी पार्टी भारत के युवाओं के साथ एक दोस्त के तौर पर खड़ी है। उन्होंने जवाबदेह सत्ता, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मानवीय गरिमा को दोनों देशों के लोगों की साझा मांग बताया।

शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन का दिया हवाला

नाहिद इस्लाम ने भारत में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में बांग्लादेश के जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भर्ती कोटे के खिलाफ शुरू हुआ छात्र-नेतृत्व वाला आंदोलन तत्कालीन सरकार के खिलाफ देशव्यापी विद्रोह में बदल गया था। उनके मुताबिक, सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए असली गोलियां चलाईं।

उन्होंने दावा किया कि बाद में संयुक्त राष्ट्र ने विद्रोह और उसे दबाने की कोशिशों के दौरान 1,400 लोगों की मौत का अनुमान लगाया था। नाहिद इस्लाम ने कहा कि बांग्लादेश के आंदोलन के दौरान भारतीय छात्रों, लेखकों और स्वतंत्र आवाजों की ओर से मिले समर्थन को उनकी पार्टी गहराई से याद करती है और उसका सम्मान करती है।

शाहीन बाग और विश्वविद्यालयों के आंदोलनों का किया जिक्र

NCP संयोजक ने भारत में लोकतांत्रिक विरोध की परंपरा का उल्लेख करते हुए शाहीन बाग की महिलाओं और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) तथा जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शाहीन बाग की महिलाओं ने दिल्ली की कड़ाके की ठंड में समान नागरिकता के अधिकार की रक्षा की, जबकि विश्वविद्यालयों में छात्रों की कई पीढ़ियों ने संगठित विरोध को जारी रखा है।

उन्होंने भारत में सड़कों पर उतरने वाली युवा महिलाओं के साहस की सराहना की और कहा कि बांग्लादेश की जुलाई क्रांति में भी महिलाएं सबसे आगे थीं। उनके मुताबिक, महिलाओं के साहस और बलिदान ने आंदोलन की जीत सुनिश्चित करने में मदद की।

हिंदुत्ववादी बहुसंख्यकवाद और सांप्रदायिक नफरत पर उठाए सवाल

नाहिद इस्लाम ने अपने बयान में हिंदुत्ववादी बहुसंख्यकवाद, फासीवाद और धार्मिक श्रेष्ठता की राजनीति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन विचारों को दक्षिण एशिया का भविष्य तय नहीं करना चाहिए। उन्होंने भारत में तानाशाही, सांप्रदायिक नफरत और राजनीतिक असहिष्णुता को भी खारिज करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया का साझा भविष्य धर्म, जाति, लिंग और वर्ग से परे सांप्रदायिक सद्भाव तथा सामाजिक न्याय पर आधारित होना चाहिए। उनके मुताबिक, कोई भी समाज तब तक पूरी तरह लोकतांत्रिक नहीं हो सकता, जब तक अल्पसंख्यक डर में जीते रहें, असहमति को अपराध माना जाए और नागरिकता पहचान पर निर्भर हो।

भारत के अधिकारियों से की प्रदर्शनकारियों की रिहाई की अपील

NCP संयोजक ने भारत के अधिकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने प्रदर्शन आयोजित करने वालों को हिरासत में लेने के कारणों और उनके ठिकाने की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने के कारण हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा करने और पत्रकारों को बिना किसी डर या उपकरण जब्त किए जाने के खतरे के रिपोर्टिंग करने देने की अपील की।

नाहिद इस्लाम ने शरजील इमाम और उमर खालिद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई युवा नेताओं को अन्यायपूर्ण तरीके से हिरासत में रखा गया है और शरजील इमाम तथा उमर खालिद सालों से बिना मुकदमे के जेल में हैं। उन्होंने भारत के युवा प्रदर्शनकारियों और अपनी अंतरात्मा की आवाज उठाने के कारण जेल में बंद लोगों को अपना साथी बताया।

सीमा विवाद, पानी के बंटवारे और संप्रभुता का भी किया उल्लेख

NCP ने अपने बयान में कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच कई अनसुलझे मुद्दे हैं, जिनमें सीमा पर होने वाली हत्याएं, पानी का बंटवारा, पर्यावरण की सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता शामिल हैं। पार्टी ने ऐसे दक्षिण एशिया की कल्पना की, जहां सभी देश एक-दूसरे को बराबरी का दर्जा दें, सरकारें जवाबदेह रहें और संप्रभुता का इस्तेमाल दूसरे देशों पर हावी होने के बहाने के रूप में न किया जाए।

अपने संदेश के अंत में नाहिद इस्लाम ने भारत के लोकतांत्रिक लोगों के प्रति समर्थन दोहराया। उन्होंने लोगों से एक-दूसरे की रक्षा करने, सांप्रदायिक नफरत को नकारने और दक्षिण एशिया के भविष्य को फासीवाद तथा बंटवारे के हवाले करने से इनकार करने की अपील की। उन्होंने अपने संदेश का समापन ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे के साथ किया।

दिल्ली में SIR के खिलाफ CJP का प्रदर्शन

दिल्ली में CJP और अन्य संगठनों के प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के आरोपों से जुड़े हैं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। CJP के आयोजकों को शनिवार को पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे लोगों को हिरासत में ले लिया गया।

इसके बाद CJP के आयोजकों ने रविवार, 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर एक और सभा का आह्वान किया। इस बीच बांग्लादेश की NCP की ओर से मिले समर्थन ने इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है।

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