250 ट्रेनें रद्द, 45 मेट्रो स्टेशन बंद होने पर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका, जल्द सुनवाई की मांग

सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश का कथित उल्लंघन होने का आरोप लगाते हुए वकील नरेंद्र मिश्रा ने CJI को आवेदन सौंपा है। याचिका पर तत्काल सुनवाई और जरूरी निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

Knews Desk- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर अवमानना याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई है। वकील नरेंद्र मिश्रा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को आवेदन देकर मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया है। आवेदन में कहा गया है कि यह मामला जनहित से जुड़ा है और इसकी गंभीरता को देखते हुए इस पर जल्द विचार किया जाना जरूरी है।

आवेदन में एमए बेबी बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले का उल्लेख किया गया है। इसमें WP (क्रिमिनल) डायरी नंबर 63544/2026 और WP (सिविल) डायरी नंबर 63560/2026 से संबंधित मामलों का हवाला दिया गया है। वकील का आरोप है कि 9 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का पालन नहीं किया गया।

आवेदन के मुताबिक, अदालत ने मेट्रो और रेलवे सेवाओं को नियंत्रित तरीके से संचालित करने, आम जनता के लिए सार्वजनिक परामर्श जारी करने और संबंधित अधिकारियों को चार दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए थे।

हालांकि, आवेदन में 9 अक्टूबर को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि 250 से अधिक ट्रेनें रद्द कर दी गईं और 45 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगा दिए गए। इन घटनाओं के आधार पर अदालत के आदेश का पालन किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

वकील नरेंद्र मिश्रा ने जनहित और मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए अनुरोध किया है कि अवमानना याचिका को तत्काल भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए। साथ ही, अदालत की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संभव होने पर उसी दिन सुनवाई करने और उचित निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

इससे पहले 9 अक्टूबर 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा था कि मेट्रो और ट्रेनों के संचालन पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। अदालत ने सेवाओं को सुचारू और नियंत्रित तरीके से चलाने पर जोर दिया था। अब अवमानना याचिका के जरिए आदेश के कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया है।

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