KNEWS DESK- नवरात्रि के व्रत में फलाहारी पकवान बनाने के लिए बाजार से आटा खरीदने की जरूरत नहीं है। कुट्टू, सिंगाड़ा, साबूदाना, शकरकंद और राजगिरा से घर पर ही ताजा आटा तैयार किया जा सकता है। जानें इन पांचों आटों को बनाने का आसान तरीका।
नवरात्रि के नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ व्रत रखते हैं। इस दौरान फलाहार के लिए कई तरह के व्यंजन तैयार किए जाते हैं। व्रत में इस्तेमाल होने वाले कुट्टू, सिंगाड़े और राजगिरा जैसे आटे बाजार में आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन आप चाहें तो इन्हें घर पर भी तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा साबूदाना और शकरकंद से भी आटा बनाया जा सकता है। घर पर आटा तैयार करने का फायदा यह है कि आप इसकी सफाई और भंडारण का ध्यान खुद रख सकते हैं। आइए जानते हैं पांच तरह के फलाहारी आटे बनाने की आसान विधि।
कुट्टू का आटा बनाने का तरीका
कुट्टू के आटे का इस्तेमाल व्रत में पूरी, रोटी, पराठे और पकौड़े बनाने के लिए किया जाता है। इसे घर पर तैयार करने के लिए आपको साबुत कुट्टू के दानों की जरूरत होगी।
सामग्री:
- 1 कप साबुत कुट्टू के दाने।
बनाने की विधि:
सबसे पहले कुट्टू के दानों को अच्छी तरह साफ कर लें और उनमें मौजूद कंकड़ या दूसरी अशुद्धियां निकाल दें। यदि आप दानों को पानी से धोते हैं, तो उन्हें पूरी तरह सुखाना जरूरी है। इसके बाद एक सूखी कड़ाही में दाने डालकर मध्यम आंच पर 3 से 5 मिनट तक हल्का भूनें। ध्यान रखें कि दाने ज्यादा न भुनें। आप चाहें तो बिना भूने दानों से भी आटा बना सकते हैं। दाने ठंडे होने के बाद उन्हें मिक्सर में डालकर बारीक पीस लें। तैयार आटे को महीन छलनी से छान लें और बचे हुए मोटे हिस्से को दोबारा पीसकर छानें। अब इसे साफ और सूखे एयरटाइट डिब्बे में भरकर रख दें। जरूरत पड़ने पर इससे व्रत के लिए कई तरह के व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं।
सिंगाड़े का आटा बनाने का तरीका
सिंगाड़े का आटा भी व्रत में इस्तेमाल किया जाता है। इससे पूरी, हलवा, पराठे और चीला बनाया जा सकता है। इसे तैयार करने के लिए सिंगाड़ों को अच्छी तरह सुखाना सबसे जरूरी है।
सामग्री:
- जरूरत के अनुसार कच्चे सिंगाड़े।
बनाने की विधि:
सबसे पहले कच्चे सिंगाड़ों के छिलके उतारकर उन्हें अच्छी तरह धो लें। इसके बाद छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर किसी साफ प्लेट या ट्रे में फैला दें। इन्हें धूप में तब तक सुखाएं, जब तक टुकड़े पूरी तरह सूखकर कड़क न हो जाएं। ध्यान रखें कि उनमें नमी न बची रहे, क्योंकि नमी से आटा जल्दी खराब हो सकता है। सिंगाड़े के टुकड़े पूरी तरह सूख जाएं, तो उन्हें ठंडा करके मिक्सर में बारीक पीस लें। इसके बाद महीन छलनी से छानें। यदि कुछ टुकड़े मोटे रह जाएं, तो उन्हें दोबारा पीस लें। तैयार आटे को साफ और सूखे एयरटाइट डिब्बे में रखें।
साबूदाने का आटा बनाने का तरीका
साबूदाने से तैयार आटे का इस्तेमाल व्रत के दौरान चीला, थालीपीठ और दूसरी फलाहारी डिशेज बनाने में किया जा सकता है। इसे बनाने के लिए साबूदाने को अच्छी तरह सुखाकर पीसना जरूरी है।
सामग्री:
- आधा कप साबूदाना।
बनाने की विधि:
एक सूखी कड़ाही को मध्यम आंच पर गर्म करें। इसमें साबूदाना डालकर 5 से 10 मिनट तक हल्का भूनें। दानों को लगातार चलाते रहें, ताकि वे जलें नहीं और अच्छी तरह सूख जाएं। इसके बाद गैस बंद कर दें और साबूदाने को पूरी तरह ठंडा होने दें।अब ठंडे साबूदाने को मिक्सर में डालकर बारीक पीस लें। तैयार पाउडर को छलनी से छानें और मोटे दानों को दोबारा पीस लें। आटे को साफ और सूखे एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें। इसका इस्तेमाल व्रत के लिए अलग-अलग व्यंजन बनाने में किया जा सकता है।
शकरकंद का आटा बनाने का तरीका
शकरकंद से भी घर पर फलाहारी आटा तैयार किया जा सकता है। इसके लिए शकरकंद को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है, ताकि पीसने के बाद आटे में नमी न रहे।
सामग्री:
- जरूरत के अनुसार शकरकंद।
बनाने की विधि:
सबसे पहले शकरकंद को अच्छी तरह धोकर छील लें। अब इन्हें पतले और छोटे टुकड़ों में काट लें। टुकड़ों को साफ प्लेट या ट्रे में फैलाकर धूप में पूरी तरह सूखने के लिए रख दें। यदि धूप उपलब्ध नहीं है, तो कम तापमान पर ओवन की मदद से भी इन्हें सुखाया जा सकता है। जब शकरकंद के टुकड़े पूरी तरह सूख जाएं, तो उन्हें ठंडा होने दें। इसके बाद मिक्सर में डालकर बारीक पीस लें। तैयार पाउडर को महीन छलनी से छानकर साफ और सूखे एयरटाइट डिब्बे में भर दें। इस आटे से व्रत के दौरान चीला, रोटी और अन्य फलाहारी व्यंजन बनाए जा सकते हैं।
राजगिरा का आटा बनाने का तरीका
राजगिरा, जिसे रामदाना भी कहा जाता है, व्रत के दौरान इस्तेमाल होने वाली सामग्री में शामिल है। इसके आटे से रोटी, पराठे, चीला और पूरी तैयार की जा सकती है।
सामग्री:
- 500 ग्राम साबुत राजगिरा यानी रामदाना।
बनाने की विधि:
सबसे पहले राजगिरा के दानों को अच्छी तरह साफ कर लें। अब एक सूखी कड़ाही गर्म करें और उसमें दाने डालकर मध्यम आंच पर 3 से 5 मिनट तक हल्का भूनें। दानों को लगातार चलाते रहें, ताकि वे ज्यादा न भुनें। इसके बाद राजगिरा को एक प्लेट में निकालकर पूरी तरह ठंडा होने दें। अब इसे मिक्सर में थोड़ा-थोड़ा डालकर बारीक पीस लें। आटे को महीन छलनी से छानें और मोटे हिस्से को दोबारा पीसकर छान लें। तैयार आटे को साफ और सूखे एयरटाइट डिब्बे में रखें।
फलाहारी आटे को स्टोर करते समय इन बातों का रखें ध्यान
घर पर तैयार किए गए फलाहारी आटे को लंबे समय तक इस्तेमाल करने के लिए कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है। आटा बनाने से पहले अनाज या अन्य सामग्री को अच्छी तरह साफ करें। जहां सामग्री को धोना जरूरी हो, वहां पीसने से पहले उसे पूरी तरह सुखा लें। आटे को हमेशा साफ, सूखे और एयरटाइट डिब्बे में रखें। डिब्बे में गीला चम्मच न डालें और आटे को नमी से दूर रखें। यदि आटे में अजीब गंध आए, रंग या बनावट बदल जाए अथवा फफूंद दिखाई दे, तो उसका इस्तेमाल न करें।
इस तरह आप नवरात्रि के व्रत के लिए घर पर ही पांच तरह के फलाहारी आटे तैयार कर सकते हैं। इससे जरूरत के अनुसार ताजा आटा उपलब्ध रहेगा और आप अपनी पसंद के फलाहारी व्यंजन आसानी से बना सकेंगे। व्रत में किसी भी सामग्री का इस्तेमाल करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि वह आपके उपवास के नियमों के अनुकूल है।