फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़े चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बुधवार को बड़ी राहत मिली। इस दौरान कोर्ट ने उन्हें कड़ी फटकार भी लगाई। कोर्ट ने उन्हें आज कोर्ट रजिस्ट्री में 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने और सोमवार को RTGS के जरिए शिकायतकर्ता के खाते में 85 लाख रुपये भेजने के वादे पर ये राहत दी है। इसके साथ ही अदालत ने बकाया रकम लौटाने के लिए कुछ शर्तें भी लगाई हैं।
Knews Desk – चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या और जस्टिस वी मोहना की बेंच को सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने बताया कि वो अपनी पुश्तैनी जमीन बेच रहे हैं, जिसकी रकम मिलने पर वो शिकायतकर्ता को पूरे पैसे वापस कर देंगे। कोर्ट ने उनके इस प्रपोजल को माना और उन्हें सजा से राहत दी। कोर्ट में राजपाल यादव के वकील ने कहा कि हमारे पास 1.15 करोड़ रुपये हैं और जो संपत्ति बेच रहे हैं, उसकी रजिस्ट्री पितृपक्ष की वजह से रुकी हुई है। ऐसे में नवरात्र की शुरुआत में ये सौदा पूरा हो जाएगा।
सीजेआई सूर्यकांत ने सवाल किया कि आपका बकाया तो दो करोड़ से ज्यादा है। तो राजपाल के वकील ने जवाब दिया कि संपत्ति की कीमत 30 करोड़ रुपये से ज्यादा है और हम इसकी बैंक गारंटी देने को भी तैयार हैं।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके 7 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया है और इसका अदालत खयाल रखे। राजपाल यादव के वकील ने कहा कि ऐसा क्लाइंट की अजीब बदकिस्मती की वजह से हुआ है। वह ‘अता पता लापता’ नाम की एक फिल्म बनाना चाहते थे। ये एक जॉइंट वेंचर था, लेकिन वकील की बात पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अब तो पैसा ही ‘लापता’ हो गया है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जजों से राजपाल यादव ने भी बात की। सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव से पूछा कोई फिल्म वगैरह बना रहे हैं या नहीं। इस पर राजपाल ने कहा, “मान्यवर प्रणाम करता हूं। 16 साल से झेल रहे हैं, पिछले 13 साल में तमाम फिल्में की हैं, लेकिन इस मामले के चलते बड़ा नुकसान हुआ है मेरा।”
राजपाल यादव ने कहा, “ये मर्चेंट ऑफ वेनिस वाला केस है। चाहो जब चाहो, जहां भेज दो, मैं हर समय रेडी हूं। लेकिन टोटल 22 करोड़ था। 5 करोड़ ने मेरे 17 करोड़ को 2013 से मिट्टी में मिला दिया और एक रुपया नहीं कमाने दिया। मेरे खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। मेरी फिल्म को रोका गया। वो 1200 थिएटर्स में रिलीज होनी थी, एक थिएटर में रिलीज नहीं पाई। 5 करोड़ का 8 करोड़ तय था, मैं लास्ट लाइन बोलूंगा।”
सुनवाई के दौरान राजपाल ने खुद कोर्ट में कहा, “2012 में मेरे दोस्त थे। बोले हजार-डेढ़ हजार करोड़ का आदमी हूं। 5 करोड़ कहां आता है और कहां जाता है। गीता की कसम खिलवा लीजिए। फिर बोले, अब तुम्हें कोर्ट में रगड़ूंगा। 5 करोड़ तो मैं 2012 में भी भर रहा था। लेकिन इस 5 करोड़ ने मेरे 22 करोड़ डुबो दिए। पिछले 16 साल में ब्रांडिंग तबाह हुई और मेरी बदनामी हुई। मैं 16 साल से सबका मनोरंजन कर रहा हूं।”
तभी सीजेआई सूर्यकांत ने राजपाल यादव से कहा, “एक अच्छी सी मूवी बना कर लोगों को एंटरटेन करो।” इस पर राजपाल ने जवाब देते हुए कहा, “सर, 2010 से 2016-17 तक जो हुआ, उसका टाइटल भी हमने सोचता है, 16 सावन।”
राजपाल को राहत जरूर मिली, लेकिन इस दौरान कोर्ट ने उनके खिलाफ सख्त तेवर भी दिखाए। सीजेआई सूर्यकांत ने राजपाल के वकील से पूछा कि आपके क्लाइंट को क्या सजा सुनाई गई है? वकील ने कहा, “तीन महीने।” तभी दूसरे पक्ष के वकील ने कहा कि उन्होंने एक दिन भी सजा नहीं काटी है। वो सिविल जेल की सजा थी। जस्टिस बागची ने कहा कि हम सजा बढ़ाने के लिए नोटिस जारी करेंगे। हम इसे बढ़ाकर दो साल कर देंगे। ठीक है? तभी राजपाल के वकील ने कहा कि कोर्ट ऐसा कर सकता है। कृपया उनकी नेक नीयत पर भी ध्यान दें। वो कोशिश कर रहे हैं।
जस्टिस बागची ने कहा, “हम इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका ये बर्ताव हमें संतुष्ट नहीं करता। आप ये समझ लें कि न तो हम आपकी नेक नीयत से प्रभावित हैं और न ही केस की मेरिट से। हम शिकायतकर्ता को उचित राहत देने के मकसद से ही यह रियायत दे रहे हैं।”